Sukhdev Bhagat Named New Chhattisgarh In-charge: कांग्रेस आलाकमान ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने कई राज्यों के प्रभारी महासचिवों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। इस बदलाव में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटाकर असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, वरिष्ठ नेता सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में भी प्रभारी बदल दिया है। पार्टी ने सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी नियुक्त किया है।
भूपेश बघेल की जगह अब सचिन पायलट पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी होंगे। पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से नेताओं के बीच मतभेद और गुटबाजी की खबरें सामने आती रही हैं।

सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ के नए प्रभारी
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में भी प्रभारी बदल दिया है। पार्टी ने सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी नियुक्त किया है। छत्तीसगढ़ संगठन की जिम्मेदारी अब सुखदेव भगत के पास होगी। राज्य में कांग्रेस संगठन को मजबूत करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पार्टी को तैयार करना नए प्रभारी के सामने अहम जिम्मेदारी होगी।
कौन हैं सुखदेव भगत…?
प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर राजनीती में आये सुखदेव भगत झारखण्ड के लोहरदगा से कांग्रेस सांसद हैं। बीते लोकसभा चुनाव में सुखदेव भगत ने लोहरदगा से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के समीर उरांव को 140,000 मतों के अंतर से हराकर यह सीट भाजपा से छीनकर कांग्रेस के खाते में डाल दी थी। वे झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और इस दौरान उनके कामकाज की सराहना होती है।
प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर आये राजनीति में
सुखदेव भगत के पिता गंधर्व भगत स्वतंत्रता सेनानी थे। इसलिए शुरुआत से ही उनके घर का माहौल अलग था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा नेतरहाट बोर्डिंग स्कूल से पूरी की। फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीजी के साथ एमफिल किया और बैंक में अधिकारी बन गए। लेकिन मन में कुछ अलग करने की कसक थी, तो नौकरी छोड़कर प्रशासिनक सेवाओं में चले गए। वर्ष 2005 में उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया और फिर राजनीति में आगे बढ़ते चले गये।
फिर राजनीति में रखा कदम
2005 में डिप्टी कलेक्टर पद से इस्तीफा देकर उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। उस समय लोहरदगा से बीजेपी के साध्नु भगत विधायक थे और दो बार जीत दर्ज करते हुए सरकार में मंत्री भी बने थे। ऐसे में सुखदेव के सामने अपनी सियासी पारी की शुरुआत करने की राह आसान नहीं थी, लेकिन फिर भी जनता ने उन पर भरोसा जताया और अपना विधायक चुना, इधर 2009 में उन्हें आजसू के केके भगत के हाथों महज 594 वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद 2015 के उपचुनाव में फिर से वापसी की।
2019 में सुखदेव भगत भले ही बीजेपी के सुदर्शन भगत के हाथों हार गए, लेकिन सियासी गलियारों में उनका कद ऊंचा हो गया। कांग्रेस को तब जोरदार झटका लगा, जब बीजेपी ने उन्हें अपने खेमे में शामिल कर लिया। हालांकि, 2024 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस की सीट पर लड़कर उन्होंने बीजेपी को झटका दे दिया।
सुखदेव भगत की राजनीतिक यात्रा पर एक दृष्टि:
| वर्ष | पद/जिम्मेदारी |
|---|---|
| 2005 | झारखंड विधानसभा सदस्य (कांग्रेस) |
| 2011 | झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष |
| 2014 | पुनः विधायक निर्वाचित |
| 2019 | लोकसभा सांसद (लोहरदगा) निर्वाचित |
| 2023 | CPP संयोजक, पाँच राज्यों के लिए |
| 2025 | AICC ऑब्जर्वर नियुक्त |

