बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य महिला आयोग की शक्तियों पर बड़ी टिप्पणी की है। गैस पाइपलाइन के लिए जमीन उपयोग और मुआवजे के विवाद में आयोग के 3 आदेशों को कोर्ट ने सिरे से निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने दो टूक कहा – महिला आयोग सलाहकारी और सिफारिशी संस्था है, कोर्ट नहीं। वह जमीन अधिग्रहण या मुआवजा तय करने का अधिकार नहीं रखता।
क्या था मामला?
मामला गैस पाइपलाइन के लिए जमीन पर उपयोग के अधिकार और उसके बदले मिलने वाले मुआवजे से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं में गेल के रायपुर-भाठागांव कार्यालय के महाप्रबंधक सुरेश बाबू और ज्वाइंट कलेक्टर रितु हेमनानी शामिल थे।
गेल का कहना था कि जमीन के उपयोग का अधिग्रहण संबंधी कार्य पूरा हो चुका है और मुआवजे की राशि भी निर्धारित की जा चुकी है। इसके बावजूद महिला आयोग ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए मुआवजा बढ़ाने और उसका भुगतान करने के निर्देश जारी किए।
कार्रवाई की चेतावनी दी थी महिला आयोग ने
महिला आयोग ने गेल के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और दीवानी कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही थी। साथ ही गैस पाइपलाइन बिछाने का काम रोकने के निर्देश दिए गए थे।
कोर्ट का फैसला?
हाईकोर्ट ने इन आदेशों को निरस्त करते हुए कहा कि महिला आयोग मूल रूप से सलाहकारी और सिफारिश करने वाली संस्था है। वह भूमि अधिग्रहण, मुआवजे की राशि अथवा निजी पक्षों के अधिकारों का न्यायिक निर्धारण नहीं कर सकता।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने 19 जून 2025, 6 जुलाई 2026 और 8 जुलाई 2026 के तीनों आदेश रद्द किए।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार महिला आयोग महिलाओं की शिकायतों के मामले में उचित कार्रवाई की मांग या सिफारिश कर सकता है, लेकिन वह पक्षकारों के कानूनी अधिकारों का अंतिम निर्धारण नहीं कर सकता।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
A: महिला आयोग के जमीन-मुआवजे से जुड़े 3 आदेश निरस्त किए।
Q2. विवाद किस बात का था?
A: GAIL गैस पाइपलाइन के लिए जमीन उपयोग और मुआवजे का।
Q3. कोर्ट ने महिला आयोग को क्या कहा?
A: आयोग सलाहकारी संस्था है, न्यायिक अधिकार तय नहीं कर सकता।
Q4. याचिका किसने लगाई थी?
A: GAIL के GM सुरेश बाबू और जॉइंट कलेक्टर रितु हेमनानी ने।
Q5. फैसले का आधार क्या?
A: सुप्रीम कोर्ट का पूर्व निर्णय कि आयोग सिफारिश ही कर सकता है।

