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Raipur: छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की मनमानी पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने बड़ा झटका दिया है। राजनांदगांव की अटल विहार योजना में मानक के अनुरूप मकान नहीं बनाने और पैसे नहीं लौटाने पर आयोग ने मंडल को ब्याज और जुर्माने सहित पूरी रकम लौटाने को कहा है।

मामला गीता शुक्ला और निर्मल शुक्ला की शिकायत से जुड़ा है। दोनों ने राजनांदगांव की अटल विहार योजना में आवास लेने के लिए कुल ₹21.83 लाख से अधिक जमा किए थे। उनका आरोप था कि मकान का निर्माण तय मानकों के मुताबिक नहीं हुआ और शिकायत करने के बाद भी उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया।

इसके बाद दोनों आवंटियों ने मकान का आवंटन निरस्त करने की मांग की। साथ ही, योजना की शर्तों के अनुसार जमा रकम ब्याज सहित वापस करने का अनुरोध किया। मामले में संबंधित संपदा प्रबंधक, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, राजनांदगांव को विपक्षी पक्ष बनाया गया था।

गृह निर्माण मंडल ने ब्याज देने का किया था विरोध

मंडल ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आवंटित मकान का निर्माण पूरा हो चुका था और आवंटियों को उसका कब्जा लेने के लिए भी कहा गया था। मंडल के मुताबिक, आवंटियों की ओर से रेरा, रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण और अन्य उपभोक्ता मंचों पर कार्यवाही किए जाने के कारण मामला लंबित रहा।

मंडल ने यह तर्क भी दिया कि आवंटन के नियमों के तहत निरस्तीकरण की स्थिति में निर्धारित कटौती के बाद ही जमा रकम लौटाई जा सकती है। उसके अनुसार, इस स्थिति में ब्याज देने का प्रावधान नहीं था और आवंटी 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के हकदार नहीं थे।

योजना की शर्तों को माना फैसले का आधार

राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान योजना की शर्तों को अहम माना। आयोग के मुताबिक, नियमों में स्पष्ट प्रावधान था कि यदि हितग्राही मकान के निर्माण कार्य या किए गए सुधारों से संतुष्ट नहीं है और आवंटन रद्द किया जाता है, तो जमा राशि 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाई जाएगी।

आयोग ने यह भी पाया कि आवंटियों की ओर से लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद मंडल ने उनकी रकम वापस नहीं की। बाद में संबंधित मकान किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया, लेकिन मूल आवंटियों की जमा राशि का भुगतान नहीं किया गया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि जब योजना के नियम ही जमा रकम पर ब्याज देने का अधिकार देते हैं, तो वैध आवेदन के बाद भी भुगतान नहीं करना सेवा में कमी के दायरे में आता है। इसी आधार पर आवंटियों को उनकी जमा राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया।

आदेश में 4 बातें:

  1. ₹21,83,567 मूल राशि वापस
  2. 19 फरवरी 2019 से भुगतान तक 7.5% सालाना ब्याज
  3. मानसिक कष्ट के लिए ₹50 हजार मुआवजा
  4. वाद खर्च के ₹20 हजार
    सभी भुगतान 30 दिन के भीतर करना होगा।

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