Surguja: छत्तीसगढ़ में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी जिला शिक्षा अधिकारी ने थाना प्रभारी को ही नोटिस थमा दिया है। और वो भी समय सीमा में जवाब देने का निर्देश देकर। अम्बिकापुर DEO के इस नोटिस ने पूरे शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल पिछले दिनों जब अंबिकापुर कलेक्टर अजीत वसंत ने सख्ती दिखाई तो शिक्षा विभाग में फाइलें खुलीं। पता चला कि उदयपुर विकासखंड के पेण्डरखी स्कूल के प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को मणीपुर थाने में अपराध क्रमांक 499/2019 धारा 147, 148, 149, 294, 323, 307 के तहत 18 अगस्त 2019 को गिरफ्तार किया गया था। सत्र न्यायालय से सजा के बाद वो 3 जनवरी 2026 से 9 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय जेल अम्बिकापुर में बंद रहे।
नियम कहता है कि किसी सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी या 48 घंटे से ज्यादा हिरासत की सूचना तुरंत उसके विभाग को देना पुलिस की वैधानिक जिम्मेदारी है, ताकि सिविल सेवा नियम 1966 के तहत निलंबन की कार्रवाई हो सके।लेकिन मणीपुर थाने ने ये सूचना 2019 में नहीं दी। 7 साल बाद, BEO उदयपुर के पत्राचार के बाद, 13 अक्टूबर 2026 को विभाग को थाने से सूचना भेजी गई।
DEO ने थानेदार से पूछे 3 तीखे सवाल
कलेक्टर की फटकार के बाद पहले तो DEO ने उदयपुर के तत्कालीन BEO और वर्तमान में MCB के DEO को नोटिस दिया, और उसके ठीक बाद सीधे मणीपुर थाना प्रभारी को नोटिस थमा दिया।
- विलंब का कारण बताओ: 2019 की गिरफ्तारी और 9 महीने जेल में रहने की सूचना देने में 7 साल की देरी क्यों हुई?
- पहले सूचना दी थी क्या?: क्या 18 अगस्त 2019 को गिरफ्तारी या सजा के समय कोई लिखित या मौखिक सूचना BEO या DEO को दी थी? अगर हां तो जावक नंबर और पावती की कॉपी दो।
- जिम्मेदारी तय करो: इतने साल सूचना न देने से शिक्षक के खिलाफ समय पर विभागीय कार्रवाई बाधित रही, इसके लिए थाने में किसकी जिम्मेदारी तय की गई?
नोटिस के पीछे ‘खेला’ तो नहीं?
शिक्षा विभाग में इस बात की चर्चा तेज है कि थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगने के पीछे कहीं तत्कालीन BEO को बचाने का खेल तो नहीं है? क्योंकि 7 साल तक BEO कार्यालय ने भी अपने प्रधान पाठक की गिरफ्तारी का पता नहीं लगाया, और अब सारा ठीकरा पुलिस पर फोड़ा जा रहा है।
बहरहाल, DEO बनाम TI का ये नोटिस-युद्ध सरगुजा में चर्चा का विषय बना हुआ है।

