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Raipur: छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास निधि के करोड़ों के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी अस्थायी कुर्की आदेश के तहत 31.70 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की हैं और 30 अक्टूबर को विशेष PMLA कोर्ट में सतपाल सिंह छाबड़ा, मंदीप चावला समेत 17 आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है।

क्या है DMF घोटाला

वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान जिलों को DMFT के तहत लगभग 9188.20 करोड़ मिले थे। कोरबा सहित अन्य जिलों में खनन प्रभावित आदिवासी गरीब परिवारों के कल्याण के लिए आए पैसे को बीज निगम के जरिए सप्लाई-बेस्ड कार्यों में डायवर्ट कर दिया गया, जहां निर्माण की जगह सामान आपूर्ति में कीमत बढ़ाकर दिखाने और कमीशन की गुंजाइश ज्यादा थी।

25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूली

जांच में खुलासा हुआ कि रेट कांट्रैक्ट होल्डर कंपनियों को जारी खरीद आदेशों पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था। ये रकम नकद और बैंकिंग दोनों माध्यमों से अफसरों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाई जाती थी, फिर अलग-अलग कंपनियों और खातों में घुमाकर लेयरिंग की जाती थी। ये तरीका सिर्फ DMF तक सीमित नहीं, बीज निगम के अन्य मदों की खरीद में भी यही खेल चल रहा था।

जांच में यह भी सामने आया कि कमीशन वसूली का यह तरीका केवल डीएमएफ की राशि से होने वाली खरीदी तक सीमित नहीं था। बीज निगम के माध्यम से अन्य मदों से की जाने वाली खरीदी में भी एजेंटों और बिचौलियों द्वारा इसी तरह कमीशन वसूले जाने की जानकारी मिली है। इससे साफ होता है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सरकारी खरीद में सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहा था।

सतपाल छाबड़ा सिंडिकेट का प्रमुख लायजनर

ईडी के मुताबिक सतपाल छाबड़ा प्रमुख बिचौलिया और वित्तीय समन्वयक था। वह ज्यादा कमीशन वाले सप्लाई कार्यों की पहचान कर विक्रेताओं में बांटता, कार्य आदेश और भुगतान में सुविधा देता और कमीशन वसूलकर सिंडिकेट में बांटता था। बैंकिंग लेनदेन और PMLA धारा 17 और 50 के बयानों से पता चला कि उसे लगभग 31 करोड़ अवैध कमीशन मिला जो परिवार, HUF और उसकी नियंत्रित संस्थाओं के खातों में आया। उसे 1 सितंबर 2026 को धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था।

ईडी का मानना है कि सतपाल सिंह चाबड़ा कमीशन के पैसों को ठिकाने लगाने और उसे वैध दिखाने के लिए अलग-अलग कंपनियों का इस्तेमाल करता था। वह बिचौलियों और अधिकारियों के बीच कड़ी का काम करता था और पूरी रकम के लेनदेन का हिसाब रखता था।

35 करोड़ प्रोसीड्स ऑफ क्राइम, 50 करोड़ तक कुर्की

ईडी ने प्रोसीड्स ऑफ क्राइम 35 करोड़ आंकी है, जिसके विरुद्ध 31.70 करोड़ कुर्क किया है। इस मामले में अब तक IAS अधिकारी रानू साहू समेत 4 गिरफ्तार हो चुके हैं और कुल 50 करोड़ की संपत्ति कुर्क हो चुकी है। कुर्क संपत्तियों में जमीन, मकान, बैंक जमा और निवेश शामिल हैं।

ईडी का कहना है कि DMF जैसी जनकल्याणकारी निधि का दुरुपयोग गंभीर अपराध है और अन्य जिलों में भी इसी पैटर्न की जांच जारी है, आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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