SURGUJA: “फिल्मों में जो देखते हैं वो असल में भी हो सकता है” – ये लाइन उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा में सच साबित हुई। बीमार मां की दवा के लिए 6000 रुपये लेकर जा रहे एक युवक से 2 पुलिसकर्मियों ने पैसे छीन लिए। विरोध करने पर उसे NDPS एक्ट में फंसाकर जेल भेज दिया। डेढ़ साल बाद अब कोर्ट ने उसे बेगुनाह मानकर रिहा किया है।

कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए IG को फैसले की प्रति भेजने का निर्देश भी दिया है।

क्या था पूरा मामला?

पीड़ित: भूषण बेक, निवासी महुआपारा, सरगुजा

13 दिसंबर 2024 की घटना: भूषण अपनी बीमार मां की दवा के लिए 6000 रुपये लेकर जा रहा था। रास्ते में गांधीनगर थाने के आरक्षक अतुल सिंह और एक अन्य पुलिसकर्मी ने उससे पूरी रकम जबरिया छीन ली।

जब भूषण ने पैसे मांगे तो पहले GPay से 2000 रुपये वापस किए। शिकायत की बात करने पर दोनों उसे थाने ले गए। वहां मोबाइल से 2000 और 2200 रुपये फिर से आरक्षक के खाते में ट्रांसफर करा लिए।

ऐसे फंसाया NDPS केस में

अपनी करतूत छिपाने के लिए पुलिस के जवानों ने भूषण पर आरोप लगाया कि उसके झोले से 40 नग बुप्रेनॉरफिन और 40 नग एवील इंजेक्शन बरामद हुए। उसे ड्रग तस्कर बताकर कोर्ट में पेश किया और जेल भेज दिया गया।

बता दें कि इस तरह के मामले में अगर सजा होती तो NDPS एक्टके तहत 10 साल की जेल और 1 लाख का जुर्माना हो सकता था।

डिजिटल सबूत से खुली पुलिस की पोल

अधिवक्ता संजय अम्बष्ट की पैरवी से कोर्ट में ये सबूत पेश किए गए:

1. बैंक ट्रांजेक्शन: जब भूषण थाने में हिरासत में था, उसी समय दोपहर 3:33, शाम 6:57 और 7:08 बजे उसके खाते से अतुल सिंह के खाते में पैसे गए।

2. पुलिस डायरी: डायरी की एंट्री से साबित हुआ कि पुलिस का “घटनास्थल पर जब्ती” का दावा झूठा था।

इन्हीं दस्तावेजी और डिजिटल सबूतों के आधार पर कोर्ट ने पुलिस की जांच को “त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद” मानते हुए भूषण को बरी कर दिया।

कोर्ट का कड़ा रुख

कोर्ट ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। मामले की विवेचना करने वाले गांधीनगर थाने के SI की जांच में भी गंभीर विसंगतियां पाई गईं।

FAQ: सरगुजा NDPS फर्जी केस

1. मामला क्या था?

पुलिसकर्मियों ने युवक से 6000 रुपये छीने। शिकायत की धमकी पर उसे NDPS में फंसाकर जेल भेज दिया।

2. पुलिस ने क्या आरोप लगाया था? 

झोले से 40 बुप्रेनॉरफिन और 40 एवील इंजेक्शन बरामद करने का दावा।

3. युवक कैसे बरी हुआ?

बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल मैसेज और पुलिस डायरी के डिजिटल सबूत से साबित हुआ कि गिरफ्तारी के समय वो थाने में था।

4. कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

युवक को बरी किया और दोषी पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई के लिए IG को रिपोर्ट भेजने को कहा।

5. कितने साल बाद रिहाई हुई?

डेढ़ साल बाद कोर्ट के आदेश पर रिहाई हुई।

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