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रायपुर। व्हाट्सएप पर फर्जी पहचान बनाकर कंपनियों से 3 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के 5 ठग गिरफ्तार किए गए हैं। ये मूलतः उल्हासनगर एवं प्रयागराज के निवासी हैं। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 1 करोड़ 38 लाख की राशि विभिन्न बैंकों में होल्ड कराई है। दोनों घटनाओं में एक ही तरीके से फर्जी व्हाट्सएप पहचान बनाकर कंपनियों के एकाउंटेंट को शिकार बनाया गया था।

पहला मामला : राठी बंधु कंपनी – 93 लाख की ठगी (थाना टिकरापारा)

शिकायतकर्ता विजय राठी, निवासी कमल विहार, राठी बंधुस कमर्शियल प्रा. लि. के निदेशक हैं। उन्होंने थाना टिकरापारा में रिपोर्ट दर्ज कराया था। बीते 19 से 21 अक्टूबर के मध्य अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके नाम एवं प्रोफाइल फोटो का दुरुपयोग कर कंपनी के एकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी को व्हाट्सएप संदेश भेजकर बैंक खातों में राशि हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए। जिस पर लेखराम चक्रधारी ने कंपनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 93 लाख रुपये बैंक खाते में हस्तांतरित कर दिए गए। टिकरापारा पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस, 66 डी आई.टी. एक्ट दर्ज कर जांच शुरू की।

दूसरा मामला : ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन कंपनी – 2 करोड़ की ठगी (थाना तेलीबांधा)

दूसरे मामले में ओमकार वरु ने थाना तेलीबांधा में रिपोर्ट दर्ज कराई। वह तेलीबांधा मैग्नेटो मॉल में स्थित ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी में मुख्य वित्त अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। किसी अज्ञात आरोपी द्वारा कंपनी के अधिकृत व्यक्ति अंशुल शर्मा के नाम एवं पहचान का दुरुपयोग कर कंपनी के एकाउंटेंट बिरेश तिवारी को व्हाट्सएप संदेश भेजकर टी-के कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में 2,00,00,000/- (दो करोड़ रुपये) हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए। उक्त निर्देशों को वास्तविक समझकर एकाउंटेंट द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा, पंडरी शाखा, रायपुर स्थित कंपनी के खाते से संबंधित खाते में दो करोड़ रुपये ऑनलाइन हस्तांतरित कर दिए गए।

पुलिस ने शुरू की जांच

दोनों मामले दर्ज कर एण्टी क्राइम एण्ड साइबर यूनिट, थाना टिकरापारा एवं तेलीबांधा की संयुक्त टीमों ने जांच शुरू की। कंपनियों के एकाउंटेंट से विस्तृत पूछताछ आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबरों एवं व्हाट्सएप प्रोफाइल का तकनीकी विश्लेषण किया । साथ ही ठगी की रकम जिन बैंक खातों में हस्तांतरित की गई थी, उनकी बैंकिंग जानकारी प्राप्त कर संबंधित खातों एवं उनसे जुड़े अन्य बैंक खातों का गहन पड़ताल की। इसमें मिले साक्ष्य के आधार पर आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की।

सर्विलांस और खातों से मिला गिरोह का सुराग

जांच में थाना टिकरापारा के प्रकरण के आरोपियों को उल्हासनगर, ठाणे (महाराष्ट्र) तथा थाना तेलीबांधा के प्रकरण के आरोपियों की प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में लोकेट कर पुलिस की दो अलग-अलग टीमें भेजी गई। उल्हासनगर में दबिश देकर तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपियों ने वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया । इस पर तीनों को गिरफ्तार कर उनसे ठगी की नगद रकम 25,000/- रुपए, घटना से संबंधित 6 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड एवं 3 पासबुक जप्त किए गए।

कोर्ट से दो आरोपियों को जमानत

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज पहुंची पुलिस टीम ने आरोपी विनय श्रीवास्तव एवं विनोद कुमार को गिरफ्तार किया। उनसे कॉल में इस्तेमाल 2 मोबाइल फोन जप्त किए गए हैं। दोनों आरोपियों को प्रयागराज न्यायालय से जमानत पर रिहा किया गया है। उन्हें प्रकरण में अग्रिम विवेचना हेतु रायपुर लाने की प्रक्रिया की जा रही है। साथ ही एक अन्य आरोपी को रायपुर उपस्थित होने नोटिस दिया गया है।

दोनों मामलों में एक ही गिरोह है शामिल

थाना टिकरापारा के प्रकरण में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की थाना तेलीबांधा में दर्ज लगभग 02 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के प्रकरण में भी संलिप्तता सामने आई है। इस संबंध में विस्तृत जांच एवं पूछताछ की जा रही है।

01 करोड़ 38 लाख की राशि होल्ड

पुलिस ने बैंकों से समन्वय स्थापित कर खातों में 1 करोड़ 38 लाख रुपये की राशि होल्ड कराई गई है, जिसमें थाना टिकरापारा के प्रकरण में 24 लाख रुपये तथा थाना तेलीबांधा के प्रकरण में 01 करोड़ 14 लाख रुपये की राशि शामिल है।

गिरफ्तार आरोपी (थाना टिकरापारा के प्रकरण में)

  1. आकाश कन्हैया लाल चुथ 20 निवासी एस.पी. पैलेस, फ्लैट नं. 08, विष्णु होटल के पास, थाना उल्हास नगर, ठाणे,
  2. साहिल रमेश नथानी 23 राहुल पैलेस चौथी मंजिल, फ्लैट नं. 405, साधुबेला स्कूल के पास, थाना उल्हास नगर, ठाणे, ।
  3. राज चन्दर लाल जुमानी 23 एसपी पैलेस, क्वार्टर नं. 301, विष्णु होटल के पास, उल्हास नगर, हाल/स्थायी पता चरण दास अपार्टमेन्ट, ब्लॉक नं. ए/99, फ्लैट नं. 209, नगर न्यूज प्रेस, थाना उल्हास नगर, ।

तेलीबांधा थाने के मामले में

  1. विनय श्रीवास्तव 47 मकान नंबर 646, मीरापुर, थाना अत्तर सुइया, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
  2. विनोद कुमार 49 वर्ष, मकान नंबर 1024, कालीबाड़ी, मुट्ठीगंज, थाना मुट्ठीगंज, प्रयागराज,

कैसे बचें इस तरह की धोखाधड़ी से ?

  1. कॉल बैक वेरिफिकेशन अनिवार्य करें: WhatsApp पर कितना भी अर्जेंट मैसेज आए, पैसा ट्रांसफर करने से पहले बॉस को सीधे कॉल करके कन्फर्म करें।
  2. दो-स्तरीय अप्रूवल बनाएं: कंपनी में 50 हजार से ऊपर के किसी भी ट्रांजेक्शन के लिए दो लोगों की मंजूरी अनिवार्य रखें।
  3. WhatsApp नंबर चेक करें: कंपनी के सभी सीनियर अधिकारियों के असली नंबर अकाउंटेंट के पास सेव होने चाहिए। अनजान नंबर से आया बॉस का मैसेज 100% फर्जी है।
  4. अर्जेंट शब्द से सावधान रहें: ठग हमेशा अर्जेंट है, अभी करो, किसी को बताना मत” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। यही रेड सिग्नल है।

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