रायपुर। एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर ने 90 वर्षीय महिला के जटिल महाधमनी एन्यूरिज्म का सफल एंडोवैस्कुलर रिपेयर किया है। यह छत्तीसगढ़ में 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीज पर EVAR प्रक्रिया का पहला सफल मामला माना जा रहा है। न्यूनतम चीरा वाली तकनीक से 4 घंटे 20 मिनट की सर्जरी के बाद मरीज को 4 दिन में छुट्टी दे दी गई।

 

64 मिमी का एन्यूरिज्म, फटने का था खतरा

 

मरीज पेट दर्द की शिकायत लेकर OPD पहुंची थीं। जांच में पता चला कि उनकी एओर्टा के निचले हिस्से में 64 मिमी का बड़ा एन्यूरिज्म था, जिसमें रक्त का थक्का भी था। डॉक्टरों ने बताया कि एन्यूरिज्म कभी भी फट सकता था, जिससे जान को गंभीर खतरा था। मामला और जटिल इसलिए था क्योंकि रक्तवाहिनी अत्यधिक घुमावदार थी और किडनी-आंतों को खून पहुंचाने वाली धमनियां एन्यूरिज्म के बहुत करीब थीं।

 

90 वर्ष की उम्र और हृदय संबंधी बीमारी के कारण ओपन सर्जरी जोखिम भरी थी। इसलिए विशेषज्ञों ने न्यूनतम इनवेसिव एंडोवैस्कुलर तकनीक (EVAR) को सबसे सुरक्षित विकल्प चुना।

 

‘रिवर्स स्लाइडिंग तकनीक’ से 4 घंटे में सर्जरी पूरी

 

26 जून 2026 को विशेषज्ञ टीम ने “रिवर्स स्लाइडिंग तकनीक” और 168 मिमी के बड़े स्टेंट ग्राफ्ट की मदद से प्रक्रिया पूरी की। चुनौती थी एन्यूरिज्म को सुरक्षित करना और साथ ही किडनी-आंतों तक रक्त प्रवाह बनाए रखना।

 

टीम में शामिल रहे:

 

– डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी : वरिष्ठ सलाहकार हृदय रोग एवं क्लीनिकल लीड, जिन्होंने प्रक्रिया का नेतृत्व किया

– डॉ. मोहम्मद वसीम खान : कार्डियोवैस्कुलर सर्जन, जिन्होंने स्टेंट पहुंचाने और रक्तस्राव रोकने का काम किया

– डॉ. अरुण अंडप्पन और डॉ. स्नेहा खोबरागड़े : एनेस्थीसिया टीम

 

सर्जरी के दौरान कोई जटिलता नहीं आई। मरीज 29 जून को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज हो गईं।

 

‘उन्नत तकनीक से अब बुजुर्गों का भी सुरक्षित इलाज संभव’

 

हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर तपानी घोष ने कहा कि यह उपलब्धि उनकी टीम की दक्षता और हर आयु वर्ग को अत्याधुनिक उपचार देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। डॉ. पाढ़ी के अनुसार आधुनिक तकनीकों से अब अधिक उम्र के मरीजों का भी सुरक्षित उपचार संभव हो पाया है।

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