कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराकर साइबर ठगी की रकम खपाने वाले 13 आरोपियों को दुर्ग जिले की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दुर्ग पुलिस ने 06 थानों एवं एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई में म्यूल बैंक खातों का खुलासा किया>
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराधों में प्रयुक्त म्यूल बैंक खातों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत दुर्ग पुलिस द्वारा छह थाना क्षेत्रों में संयुक्त कार्रवाई की गई। बैंक खातों के विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्यों एवं विवेचना के आधार पर कुल 13 व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई। जांच का उद्देश्य साइबर ठगी की रकम के अवैध हस्तांतरण में प्रयुक्त बैंक खातों की पहचान कर संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाना है।
साइबर अपराधियों द्वारा ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर उसकी वास्तविक प्रकृति एवं स्रोत छिपाने के लिए म्यूल बैंक खातों का उपयोग किया जाता है। ऐसे खातों का संचालन करने वाले व्यक्तियों को प्रायः कमीशन अथवा अन्य आर्थिक लाभ का लालच दिया जाता है।
दुर्ग पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बैंक खातों की जानकारी, उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों एवं अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा 5,000 से 15,000 रुपये तक के कमीशन अथवा प्रतिफल के बदले अपने या अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों से संबंधित पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक एवं सिम कार्ड अन्य लोगों को उपलब्ध कराए गए थे।
प्रारंभिक जांच में इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन एवं हस्तांतरण में होना पाया गया। संबंधित खातों में लाखों रुपये से अधिक की लेन-देन राशि सामने आने पर पुलिस द्वारा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच करते हुए कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई में थाना नेवई, पुरानी भिलाई, भिलाई भट्ठी, भिलाई नगर, सुपेला एवं खुर्सीपार पुलिस तथा एसीसीयू की टीम शामिल रही।
मॉडस ऑपरेंडी (अपराध करने का तरीका)
आरोपियों द्वारा कमीशन अथवा आर्थिक लाभ के लालच में बैंक खाते एवं उनसे संबंधित दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक तथा सिम कार्ड अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराए गए। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने तथा उसके लेन-देन को संचालित करने के लिए किया गया। इस प्रकार खाताधारकों के बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराधों से अर्जित धनराशि के हस्तांतरण में किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
जप्त सामग्री
बैंक पासबुक।एटीएम कार्ड।चेकबुक।मोबाइल सिम कार्ड।
मोबाइल फोन एवं अन्य संबंधित दस्तावेज।
सराहनीय कार्य
उक्त कार्रवाई में थाना नेवई, पुरानी भिलाई, भिलाई भट्ठी, भिलाई नगर, सुपेला एवं खुर्सीपार की पुलिस टीमों तथा एसीसीयू के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संबंधित बैंक खातों के विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्यों के परीक्षण एवं विभिन्न थाना क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई के माध्यम से संदिग्ध खाताधारकों की पहचान कर वैधानिक कार्रवाई की गई।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन अथवा आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, बैंकिंग संबंधी जानकारी या मोबाइल सिम कार्ड उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। आपके बैंक खाते का उपयोग साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने अथवा हस्तांतरित करने में किया जा सकता है, जिससे आप भी जांच एवं कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
यदि आपके बैंक खाते या अन्य बैंकिंग साधनों का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है, तो तत्काल संबंधित बैंक एवं नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
आपका बैंक खाता, आपकी जिम्मेदारी — कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते का उपयोग साइबर अपराधों के लिए न होने दें।

