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धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां मामूली सी बात ने खूनी रूप ले लिया। खल्लारी थाना क्षेत्र के वनांचल गांव फरसगांव में मोबाइल चलाने की बात पर हुए विवाद में बड़े भाई ने छोटे भाई की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

मोबाइल बंद करने को कहा तो भड़क गया विवाद

जानकारी के मुताबिक 25 अक्टूबर की शाम कुंदन सोरी (मृतक) घर में मोबाइल पर व्यस्त था। बड़े भाई कैलाश सोरी ने उसे टोका और मोबाइल बंद कर काम करने की बात कही। इसी बात पर दोनों में बहस शुरू हो गई।

बताया जा रहा है कि कहासुनी इतनी बढ़ गई कि गुस्से में कैलाश ने घर में रखा लकड़ी का डंडा उठा लिया और कुंदन के सिर पर कई वार कर दिए। गंभीर चोट लगने से कुंदन की मौके पर ही मौत हो गई।

गांव में हड़कंप, आरोपी गिरफ्तार

घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों की सूचना पर खल्लारी थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और आरोपी कैलाश सोरी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

मोबाइल की लत बन रही है खतरे की घंटी

मोबाइल को लेकर यह अकेली घटना नहीं है। आजकल हर घर में बच्चे घंटों तक मोबाइल, गेम और रील्स में लगे रहते हैं। टोकने पर गुस्सा, चिड़चिड़ापन और झगड़ा आम हो गया है। मनोचिकित्सकों के अनुसार मोबाइल एडिक्शन से बच्चों में सहनशीलता खत्म हो रही है और छोटी-छोटी बातों पर हिंसक प्रतिक्रिया बढ़ रही है। धमतरी की यह वारदात उसी का एक खतरनाक उदाहरण है।

माता-पिता जरूर ध्यान दें

  1. समय तय करें: बच्चों को दिन में सिर्फ 1-2 घंटे ही मोबाइल दें, वह भी पढ़ाई या जरूरी काम के लिए। खाने और सोने के समय मोबाइल पूरी तरह बंद रखें।
  2. डांटे नहीं, बात करें: मोबाइल को लेकर सीधे डांटने या छीनने से बच्चा और ज्यादा जिद्दी होता है। प्यार से समझाएं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम आंखों और दिमाग के लिए कितना नुकसानदायक है।
  3. विकल्प दें: बच्चों को खेल, किताबें, पेंटिंग, या बाहर दोस्तों के साथ खेलने के लिए प्रेरित करें। जब उनके पास करने को कुछ होगा तो मोबाइल की तरफ ध्यान कम जाएगा।
  4. खुद उदाहरण बनें: अगर माता-पिता खुद दिनभर मोबाइल पर रहेंगे तो बच्चे भी वही सीखेंगे। घर में नो-मोबाइल जोन बनाएं।
  5. गुस्से पर कंट्रोल सिखाएं: बच्चों को सिखाएं कि गुस्सा आने पर तुरंत रिएक्ट न करें, गहरी सांस लें और बातचीत से मसला हल करें। छोटा विवाद हत्या जैसी बड़ी वारदात बन सकता है।

धमतरी की घटना ने एक बार फिर सभी परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारा बच्चा भी मोबाइल का गुलाम बनता जा रहा है? समय रहते ध्यान नहीं दिया तो अंजाम बहुत बुरा हो सकता है।

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