0 कोरबा के ग्राम करूमौहा में हुए जमीन घोटाले की समग्र जांच और सभी दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग
कोरबा। कोरबा जिले के बिना नक्शा वाले याने ‘मसाहती’ गांवों में किया गया घोटाला समय-समय पर उजागर होता रहा है। इस बार यहां के भैसमा तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव करूमौहा में बड़ी गड़बड़ी सामने आयी है। इस मामले की प्रारंभिक जांच के बाद घोटाले के दौरान पदस्थ पटवारी को निलंबित कर दिया गया है। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि फर्जीवाड़ा करने वालों में राजस्व अमले के अलावा जमीन मालिक, खरीददार और भूमाफिया भी शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ FIR दर्ज कराया जाये, ताकि समुचित कार्रवाई हो सके।

दरअसल ग्राम करूमौहा निवासी गंगाराम रात्रे और अन्य ग्रामीणों ने गांव में जमीनों की बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में की थी। जिसकी जांच के दौरान बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां समय-समय पर जमीन की खरीद-बिक्री तो हुई मगर पटवारी और राजस्व अमले से मिलीभगत करके जमीनों का रकबा याने आकार फिर से बढ़ा दिया गया है। ग्रामीणों द्वारा की गई अलग-अलग शिकायतों में शामिल एक प्रकरण में करूमौहा स्थित जमीनों का रकबा पुराने मिसल रिकॉर्ड से भी बढ़ा दिए जाने की शिकायत की गई थी।

मिसल और अधिकार अभिलेख में अंतर नहीं, मगर…
मामले की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि सन 1926 में बने मिसल रिकॉर्ड में खसरा नंबर 84 रकबा 1.13 एकड़ भूमि भोदू वल्द चमरू रावत के नाम पर दर्ज है। वहीं 1954 में बने अधिकार अभिलेख में ख.नं. 84 रकबा 1.13 एकड़ /0.458 हे. धनसाय पिता सुकनाथ के नाम पर दर्ज है। संभवतः यह जमीन अगली पीढ़ी को हस्तांतरित हो गई, मगर कालांतर में खसरा पांचसाला रिकार्ड वर्ष 2021-2022 से 2025-2026 में उक्त खसरा नंबर में जमीन के रकबा याने आकार में आश्चर्यजनक ढंग से बदलाव आया है।

दरअसल समय-समय पर खसरा नंबर 84 के कई टुकड़े हुए और इन्हीं में खसरा नंबर 84/4/ख-सुंदर सिंह पिता गंभीर साय व अन्य के नाम पर 71.000 हेक्टेयर जमीन दर्शा दी गई। जबकि मिसल में खसरा नंबर 84 का पूरा रकबा ही 1.13 एकड़ याने 0.458 हेक्टेयर था। इस तरह कुल रकबा 71.529 (मिसल के मूल रकबा से 71.071 हे. ज्यादा रकबा) संबंधितों के नाम पर दर्ज है।
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि उक्त खसरा नंबर राजस्व अभिलेख में किस आदेश के तहत दर्ज किया गया है, उसकी जानकारी राजस्व अभिलेखों से प्राप्त नहीं हो सकी है।
पटवारी ने भुइयां में ऑनलाइन बढ़ा दी जमीन
छत्तीसगढ़ सरकार के जमीनों से संबंधित पोर्टल ‘भुईयां’ के खसरा Log अनुसार दिनांक 08.08.2023 को ख.नं. 84/4 ख रकबा 0.710 हे. से बढ़ाकर रकबा 71.000 हे. किया गया एवं इसके तीन बटांकन ख.नं. 84/4 ख रकबा 0.710 हे. सुंदर सिंह पिता गंभीर साय, ख.नं. 84/6 रकबा 1.599 हे., जबकि ख.नं. 84/7 रकबा 68.691 हे. भूमिस्वामी ‘नामालूम’ के नाम से दर्ज किया गया। अब तक इस बात की जांच नहीं हो सकी है कि ‘नामालूम’ शख्स आखिर कौन है और इस फर्जीवाडेम के तहत कौन सी जमीन पर कब्जा करने का षड्यंत्र रचा गया था।
ऐसे एक नहीं कई मामले…
मसाहती ग्राम करूमौहा में ऐसे कई घोटाले हैं जो समय-समय पर किये गए, हालांकि जांच के दौरान दिलीप सिंह नामक पटवारी के कार्यकाल की गड़बड़ी सामने आई। ये वही मामले हैं जिनकी लिखित शिकायत गंगाराम रात्रे और ग्रामीणों ने मिलकर की थी। भैसमा के तहसीलदार ने इस तह की गड़बड़ी और भी होने की आशंका जताते पूरे गांव की जमीन के लेखा-जोखे की जांच करने का सुझाव दिया है।



जंगल की जमीन पर किया कब्जा
सवाल यह भी है कि अगर जमीनों का रकबा बढ़ा दिया गया है तो बढ़ाई गई जमीन आएगी कहां से ? इसके जवाब में गंगाराम रात्रे और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि चूंकि करूमौहा मसाहती गांव है, इसलिए जमीन मालिकों ने पटवारी से मिलीभगत से जमीन से लगी हुई वन विभाग की जमीन पर कब्जा करते हुए दीवार भी खड़ी कर दी है। वर्तमान में जिन्हें जमीन बेचीं गई है, उन्होंने यह कृत्य किया है और अभी वे अन्य शासकीय जमीनों पर भी कब्जा करने की फिराक में हैं। यहां सवाल यह भी है कि अगर जंगल की जमीन पर कब्ज़ा हुआ है तो वन अमला क्या कर रहा है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

क्या केवल पटवारी ही घोटाले का दोषी है…?
इस गांव में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद केवल यहां के पूर्व पटवारी दीपक सिंह को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है। सवाल यह उठता है कि यहां हुए इस जमीन घोटाले का केवल पटवारी दीपक सिंह ही दोषी है ? शिकायत करने वाले ग्रामीण भी यही सवाल उठा रहे हैं। इनका कहना है कि समय-समय पर यहां जमीनों का रकबा बढ़ता चला गया, जमीनों का सीमांकन हुआ, जमीन किसी और को बेच भी दी गई, और नामांतरण भी हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पटवारी ने रकबा बढ़ाया है, इसका लाभ जमीन मालिक को हुआ। मालिक ने अपनी जमीन बेचीं, तब रिकॉर्ड देखकर नामांतरण किया गया है। ऐसे में पटवारी के ऊपर के राजस्व अमले की भी जिम्मेदारी बनती है।

कार्रवाई के लिए 10 दिनों का अल्टीमेटम
जमीन के इस बड़े घोटाले में दोषी समस्त लोगों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग के करूमौहा के ग्रामीणों ने की है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा है कि पटवारी, क्रेता, विक्रेता, गवाह और भूमाफियाओं द्वारा यह फर्जीवाड़ा किया गया है, आठ इन सभी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया जाये। ग्रामीणों ने 10 दिनों के भीतर कार्यवाही की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर कोई पहल नहीं की गई तो SDM कार्यालय का घेराव किया जायेगा।
बहरहाल देखना यह है कि प्रशासन इस गांव में हुए घोटालों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही में कितनी रूचि दिखाता है।
देखिये मामले का जांच प्रतिवेदन :





