रायपुर। PSC -21 घोटाले की जांच के लिए CBI की अधिकृत अधिसूचना जारी होने में कम से कम हफ्ते भर का समय और लग सकता है। इसके लिए सबसे पहले राज्य सरकार का सामान्य प्रशासन अधिसूचना जारी करेगा। इसके बाद यह अधिसूचना सीबीआई दिल्ली को भेजी जाएगी जहां इसकी स्क्रूटनी की जाएगी कि यह केस जांच के लिए लिया जाए या नहीं। इसमें किसी तरह की कमी होने पर सीबीआई राज्य सरकार के पूछताछ करेगी। उसके बाद सीबीआई अधिकृत आदेश जारी करेगी। इस आधार पर केस दर्ज कर सीबीआई, पीएससी और कोर्ट में जमा दस्तावेजों की मांग करेगी। इनके अध्ययन के बाद जांचकर्ता अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर पांच वर्ष से लगी रोक हटा ली है। बुधवार को कैबिनेट ने यह फैसला करते हुए पीएससी-21 के नतीजों में किए गए घोटाले की जांच की सिफारिश कर दी है।170 पदों पर हुई भर्ती के लिए हुई इस परीक्षा में पीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के दत्तक पुत्र, एक भतीजी , राजभवन में सचिव अमृत खलको को पुत्र ,समेत कुछ अफसरों और कांग्रेस नेताओं के पुत्र,पुत्री और बहु ओं का चयन किया गया था । इस सूची को लेकर चुनाव पूर्व प्रदेश के युवाओं ने बड़ा विरोध किया। युवाओं की याचिका पर हाईकोर्ट ने भी पीएससी, सरकार के उपर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए चयनितों की पोस्टिंग पर रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि भाजपा, यहां तक की पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह भी अपनी सभाओं में पीएससी के घोटालेबाजों को जेल भेजने की बात कहते रहे हैं। भाजपा ने युवाओं को वोट हासिल करने इस घोटाले की सीबीआई जांच का वादा अपने संकल्प पत्र में भी किया था। अंतत: साय कैबिनेट ने यह फैसला कर सिफारिश कर दी है। जांच के तौर करीके और बिंदू अगले कुछ दिनों में अधिसूचित कर गवाही के लिए अभ्यर्थियों को भी बुलाया जाएगा। इस जांच के लिए माना रोड स्थित सीबीआई के एंटी करप्शन विंग के राज्य मुख्यालय में कार्यालय बनाया जाएगा।

CBI को प्रदेश में जांच से रोका था कांग्रेस ने

बता दें कि पूर्ववर्ती बघेल सरकार ने वर्ष 2019 में केंद्रीय जांच ब्यूरो के राज्य में आकर किसी भी तरह की जांच पर रोक लगाई थी। केवल छत्तीसगढ़ स्थित केंद्रीय विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की जा सकती थी । कुछेक मामलों में ब्यूरो की टीम सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश पर यहां कर जांच कर चुकी है । ये मामले अन्य राज्यों में चल रहे थे। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही यह साफ हो गया था कि सीबीआई की जांच पर लगी रोक हटा ली जाएगी।

पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच की टाइप लिमिट तय करे- बघेल

इधर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने पीएससी-21 घोटाले की सीबीआई जांच के फैसले पर कहा कि जांच देना काफी नहीं है। टाइम लिमिट तय होना चाहिए। कितने दिन में कार्रवाई करेंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। जो भी सच्चाई है जनता के सामने जल्द से जल्द आना चाहिए। क्योंकि बहु बड़ी जांच नहीं होनी है। दो चार अधिकारियों के बच्चे हैं जिनके चयन का आरोप लगा रहे। उनसे ही पूछना है बस। कितना देर लगना है, टाइम लिमिट तय करे सरकार। बघेल ने 2008 पीएससी का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें आरोपी तय हो गए थे। किसका-किसका गलत चयन हुआ था, वो भी जानकारी है। दस साल भाजपा की सरकार रही कार्रवाई हुई क्या?

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