blind’ murder in Singarpur: 19 सितंबर 2026 की रात। भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के सिंगारपुर गांव के बड़े तालाब के पास एक लाश पड़ी थी। सिर और चेहरे पर गहरी चोटें, पास में पत्थर और लकड़ी के निशान। पहचान हुई – राजाराम साहू उर्फ चोंटी। प्रार्थी सुखदेव साहू की रिपोर्ट पर थाना भाटापारा ग्रामीण में अपराध क्रमांक 556/2026, धारा 103(1) BNS के तहत अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ। कोई गवाह नहीं, कोई हथियार नहीं – पुलिस के सामने था एक परफेक्ट ‘ब्लाइंड मर्डर’।
SP ने पुरानी रंजिश का एंगल निकाला
मामले की गंभीरता देखते हुए SP गौरव राय ने भाटापारा ग्रामीण थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम बनाई। गांव में पूछताछ, कॉल डिटेल, घटनास्थल से बारीक साक्ष्य। तभी एक नाम उभरा – गांव का ही रामप्रसाद साहू। मृतक और रामप्रसाद के बीच पुरानी रंजिश की बात कई लोगों ने बताई। 21 सितंबर को पुलिस ने रामप्रसाद को हिरासत में लिया, लेकिन उसने साफ इनकार कर दिया। पुलिस के पास शक था, सबूत नहीं।
ऐसे दो सबूत जिसने केस पलट दिया
इसी बीच थाना प्रभारी हेमंत पटेल ने दो चीजें जब्त की थीं – घटना के वक्त आरोपी के पहने हुए कपड़े जिन पर खून के हल्के धब्बे थे, और घटनास्थल के पास से मिला एक लकड़ी का डंडा। दोनों को रायपुर स्थित राज्य फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (SFSL) भेजा गया। पूरा केस अब साइंस पर टिका था।
वो रिपोर्ट जिसने झूठ का पर्दाफाश किया
12 अक्टूबर 2026 को SFSL से DNA रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में साफ लिखा था – आरोपी के कपड़ों और डंडे पर मिला रक्त मृतक राजाराम साहू के DNA प्रोफाइल से 100% मैच करता है। यह वैज्ञानिक साक्ष्य पुलिस के शक को पुख्ता सबूत में बदल चुका था।
आखिरकार टूटा आरोपी, जुर्म कबूला
DNA रिपोर्ट के साथ पुलिस ने 14 अक्टूबर को रामप्रसाद से दोबारा पूछताछ की। इस बार वह टूट गया और कबूल किया कि पुरानी रंजिश के चलते ही उसने पत्थर और डंडे से राजाराम पर हमला कर हत्या की थी। पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर कोर्ट भेज दिया।
पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। एक अंधा कत्ल, जो लगभग सुलझने से बाहर था, DNA की एक रिपोर्ट ने सुलझा दिया।

