रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पहली बार आयोजित मुस्लिम महासभा में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं, वहीं इस मामले में देश के चार प्रमुख शंकराचार्यों में से एक अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुस्लिमों द्वारा किए जा रहे प्रयास की सराहना की और कहा कि इससे देश में दोनों समुदायों के बीच सद्भावना बढ़ेगी।

रायपुर जिले के आरंग में हुई तथाकथित मॉब लिंचिंग की घटना से उद्वेलित मुस्लिम समाज के लोगों ने पिछले दिनों इस घटना को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और सांकेतिक गिरफ्तारी दी। इसके बाद कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। हालांकि इस घटना को लेकर असंतोष बरकरार रहा। इसे देखते हुए समाज के प्रमुख लोगों की पहल पर मुस्लिम महासभा का आयोजन राजधानी रायपुर के बैजनाथ पारा स्थित मुस्लिम हॉल में किया गया, जिसमें प्रदेश भर से मुस्लिम समाज के लोग हजारों की संख्या में पहुंचे। पूरे प्रदेश से मस्जिदों के मुतवल्ली, अंजुमन कमेटियों के अध्यक्ष, दरगाह कमेटियों के अध्यक्ष को भी महासभा में आमंत्रित किया गया था।

 

समाज प्रमुखों ने गुस्से का किया इजहार

इस मौके पर समाज के साथ हो रही ज्यादतियों के लिए एकसाथ खड़े होने व छत्तीसगढ़ में विगत दिनों से घट रही घटनाओं पर मंथन किया गया।

बता दें कि आरंग में घटी कथित मॉब लिंचिंग की घटना जिसमें 3 मुस्लिम युवकों को गौ तस्करी के नाम पर बेरहमी से पीट पीट कर नदी में फेंक कर मार दिए जाने के आरोप लगे हैं। वहीं सत्तापक्ष के एक कद्दावर नेता के द्वारा युवकों के कूद कर जान देने के बयान को लेकर भी समाज के लोग काफी गुस्से में हैं। आरंग की घटना में छत्तीसगढ़ पुलिस के द्वारा ठोस कार्यवाही न होने एवं सभी आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर भी इस सभा में चर्चा हुई और वक्ताओं ने नाराजगी का इजहार किया।

गौहत्या बंद करने और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

छत्तीसगढ़ में मुस्लिम समाज की इस पहली महासभा में समाज के लोगों ने एकजुटता दिखाई और सरकार के समक्ष कुछ मांगें रखने के लिए प्रस्ताव भी पारित किया गया।

इस महासभा की पहली और महत्वपूर्ण मांग यह रही कि गौ तस्करी पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए व गौ तस्करी करने वालों पर सख्त कार्यवाही की जाए, साथ ही यह तय किया गया कि बहुसंख्यको की आस्था व धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मांग की जाएगी।

यह मांग भी रखी गई कि पूरे देश से बीफ का एक्सपोर्ट तत्काल बंद किया जाए, क्योंकि इसमें भी बीफ को एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के नाम अल कबीर जैसे मुस्लिम नाम से है मगर दूसरे धर्म के लोग कंपनी चला रहे हैं व बदनाम मुस्लिम समाज को कर रहे हैं, इन्हें तत्काल बन्द होना चाहिए, आरंग हत्याकांड व बीरनपुर हत्याकांड जैसे मामलों में प्रशासन का रवैया उदासीन लगता है। कवर्धा की घटना में मुस्लिम नौजवानों पर दुर्भावना पूर्ण आतंकी धराए लगाना व मुस्लिमों के घरों पर बुल्डोजर जैसी कार्यवाही का केवल मुस्लिम समाज के होने को दुर्भावनापूर्ण बताया गया।

इसके अलावा फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया पर इस्लाम धर्म और मुस्लिम समाज के खिलाफ अभद्र अपमानजनक पोस्ट डालकर सदभाव खराब करना व पूरे प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय को टारगेट किये जाने को लेकर समाज ने नाराजगी जाहिर की।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की ये रही प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित इस सभा को लेकर मीडिया द्वारा स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया चाही गई, तब उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों में कुछ विघ्नसंतोषी तत्व हैं जो समाज में द्वेष पैदा करने की कोशिश करते रहते हैं। ऐसे में मुस्लिम समाज की सभा में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठी है, वह सराहनीय है।

’राष्ट्रीय पशु नहीं राष्ट्र माता घोषित की जाय’

बता दें कि उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मुहिम चला रखी है और वे इस अभियान को लेकर पूरे देश में भ्रमण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी यही लड़ाई है कि गाय को राष्ट्रीय पशु नहीं राष्ट्र माता घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारों ने गाय को पशु की श्रेणी में डाल रखा है, जबकि हिन्दू समाज में उसे माता का दर्जा दिया गया है। इसीलिए वे देशभर में यह मुहिम चला रहे हैं।

’इस पहल से देश में बढ़ेगी सद्भावना’

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मुस्लिम महासभा में हुई चर्चा को लेकर कहा कि मुस्लिम बंधुओं ने गौमाता को लेकर प्रस्ताव पारित किया है, तो यह निश्चित रूप से अच्छा है और इससे बहुत सद्भावना बढ़ेगी और आपस की जो खाई है वह पट जायेगी। मुसलमान हमारी भावनाओं को समझकर उसका आदर करना चाहते हैं, ये हमारे लिए अच्छी बात है, इसके लिए बैठक में शामिल मुस्लिम बंधुओं का, मुस्लिम विद्वानों का हम आदर करना चाहेंगे।

गौरतलब है कि संभवतः यह देश में पहली बार हुआ है जब खुद मुस्लिम समाज ने आगे बढ़कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर डाली है। उनकी इस मांग के पीछे की वजह को समझने की जरूरत है। उम्मीद की जानी चाहिए कि देश का बहुसंख्यक वर्ग भी इस दिशा में गंभीरता से विचार करके सांप्रदायिक सद्भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।

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