रायपुर। स्वास्थ्य विभाग में एक NGO को लाखों रूपये का भुगतान कर दिया गया। मामले की जांच हुई तो NGO का कोई अस्तित्व भी नहीं मिला। इस प्रकरण में रायपुर जिले की CMHO मीरा बघेल को दोषी पाए जाने के बाद अब कार्रवाई के लिए शासन को अनुशंसा भेजी गई है जबकि उक्त अधिकारी पहले ही रिटायर हो चुकी हैं। और नई सरकार के आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

इस तरह किया घोटाला…

उप संचालक, स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा इस संबंध में पत्र अवर सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को प्रेषित किया गया है, जिसमें उल्लेख है कि डॉ.मीरा बघेल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर (तत्कालीन) द्वारा कोविड-19 के द्वितीय लहर में कोविड केयर सेन्टर चिकित्सालय, माना रायपुर के द्वारा “डॉक्टर फार यू” नामक एन.जी.ओ. के नाम से लगभग 28 लाख रूपये का भुगतान किया गया था। जांच में यह भुगतान फर्जी पाया गया। इस संबंध में जांच प्रतिवेदन में डॉ.मीरा बघेल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर को दोषी ठहराये जाने के फलस्वरूप अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया था।

उप संचालक ने उल्लेख किया है कि चूंकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन चिकित्सा विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारियों के नियुक्तिकर्ता/पदोन्नतिकर्ता अधिकारी शासन है। अतः डॉ. मीरा बघेल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (यथासंशोधित) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 17 (क) के तहत जांच हेतु अनुमोदन प्रदाय किए जाने के संबंध में शासन स्तर से निर्णय लिए जाने हेतु प्रेषित है।

रिटायर हुए डेढ़ वर्ष बीत गए..!

बता दें कि पूर्व के कांग्रेस के शासनकाल में इस घोटाले की जांच शुरू की गई थी। और मामले में कार्रवाई की अनुशंसा अब जाकर की गई है। मिली जानकारी के मुताबिक सन 2021 में जब कोरोना काल की दूसरी लहर आई, तब “डॉक्टर फार यू” नामक ऐसे एन.जी.ओ. के नाम पर अनाप-शनाप भुगतान किया गया, जिसका बाद में कुछ भी पता नहीं चला। जांच के दौरान ऐसे कई बिल पाए गए जो पूरी तरह फर्जी थे। हालांकि CMHO मीरा बघेल को रिटायर हुए लगभग डेढ़ वर्ष हो चुके हैं, बावजूद इसके उनके खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट को ठन्डे बस्ते में डालकर रख दिया गया था। नई सरकार के आने के लगभग 4 महीने बाद अब जाकर स्वास्थ्य मंत्रालय को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।

अनुमति के नाम पर मामले को लटकाया

इस प्रकरण के संबंध में यह भी जानकारी मिली है कि इस मामले में कार्रवाई के लिए EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग) को काफी पहले लिखा जा चुका है, मगर शासन से अनुमति लेने के नाम पर अब तक FIR दर्ज नहीं किया है। बता दें कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 17 (क) के किसी शासकीय सेवक के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति लेनी होती है। मगर सवाल यह है कि मीरा बघेल तो अब रिटायर हो चुकी हैं, ऐसे में उनके ऊपर यह नियम कैसे लागू होता है ? अब भी इसी धारा की आड़ में मामले को लटकाकर रखने की मंशा विभाग के अधिकारियों की नजर आ रही है।

बहरहाल देखना ये है कि शासन को लाखों रुपयों का नुकसान पहुंचाने वाले इस मामले शासन स्तर पर कार्रवाई की जाती है या मामले को ठन्डे बस्ते में डाल कर रख दिया जायेगा।

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