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रायपुर। छत्तीसगढ़ के अनेक जिले नक्सल प्रभावित हैं, जहां अब तक सैकड़ों जवान मारे जा चुके हैं, वहीं बड़ी संख्या में आम लोगों की भी नक्सलियों ने हत्या कर दी है। इसी के मद्देनजर सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए पुनर्वास नीति भी लागू की है, मगर कई पीड़ित परिवार अब भी सरकार की योजनाओं का लाभ हासिल करने के लिए भटक रहे हैं। अविभाजित राजनांदगांव जिले के दो दर्जन से भी अधिक नक्सल प्रभावित परिवार पिछले कई सालों से न्याय पाने के लिए भटक रहे हैं। इन पीड़ितों का परिवार राजधानी पहुंचा और CM विष्णुदेव साय से मुलाकात कर पुनर्वास योजना का लाभ देने की गुहार लगाई।

राजनांदगांव और अब उससे टूटकर बने मोहला-मानपुर जिले के नक्सल प्रभावित ग्रामीण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलने के लिए राजधानी रायपुर पहुंचे। इससे पूर्व TRP न्यूज़ से चर्चा करते हुए इन्होने बताया कि पीड़ितों में किसी के पिता, किसी के पुत्र या किसी के पति को नक्सलियों ने मार दिया है। इनका कहना है कि कुछ नक्सल पीड़ित परिवारों को पुनर्वास योजना का लाभ मिल रहा है, लेकिन आज भी कई ऐसे नक्सल पीड़ित परिवार हैं, जिन्हें आज तक पुनर्वास योजना का लाभ नहीं मिला है।

एक ही जिले में इतने पीड़ित परिवार

नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्य धीरेंद्र साहू ने बताया कि राजनांदगांव मोहला मानपुर के 120 ऐसे परिवार हैं, जो आज भी नक्सली समस्या का दंश झेल रहे हैं। ना तो उनकी सरकार ने सुध ली है और ना ही इन्हें किसी योजना का लाभ मिला। यही वजह है कि नक्सल पीड़ित परिवार पुनर्वास योजना का लाभ देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिलने पहुंचे हैं।

पुनर्वास नीति का लाभ नहीं

राजनांदगांव, मोहला मानपुर से आये नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्य धीरेंद्र साहू का कहना है कि, नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा पुनर्वास नीति बनाई गई है, जिसमें पीड़ित परिवार को शासकीय नौकरी, मकान, बस पास, आर्थिक सहायता जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है, लेकिन इसका लाभ हमें नहीं मिल रहा है। इसके लिए लगातार शासन-प्रशासन को हमने आवेदन दिया, आंदोलन किया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।” जिला कलेक्टर उन्हें नियमों का हवाला देकर टाल देते हैं। पीड़ितों ने बताया कि कुछ लोगों को कलेक्टर दर पर सफाई कर्मी जैसे चतुर्थ वर्ग का काम तो दिया गया, मगर उन्हें महीने में बमुश्किल 2 हजार रूपये दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

इन नक्सल प्रभावितों से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय देर शाम मिले। उन्होंने इनकी बातें सुनी और समस्याओं को जाना। इनकी केवल एक ही मांग है कि उन्हें केंद्र तथा राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का जो लाभ दूसरों को दिया गया, वही उन्हें भी दिया जाये। मुख्यमंत्री ने इन सभी को पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिलाने के लिए आश्वस्त किया है।

कर्मा परिवार को मिला लाभ, दूसरों को क्यों नहीं..?

इन नक्सल पीड़ित परिवारों ने इससे पहले भी रायपुर में आंदोलन किया था और ज्ञापन सौंपा था। इनकी मांग है कि जिस तरह से झीरम हमले में प्रभावित कर्मा परिवार तथा अन्य परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से राशि और नौकरी दी गई है, उसी तरह हम नक्सल पीड़ितों परिवारों को भी केंद्र और राज्य की ओर से राशि और नौकरी मिलनी चाहिए। धीरेंद्र साहू का कहना है कि “झीरम नक्सली हमले में महेंद्र कर्मा के परिवार को राशि और शासकीय नौकरी दी गई है, लेकिन अन्य नक्सली पीड़ित परिवारों को अब तक यह लाभ नहीं मिल सका है।”

मृतकों को दिया जाये शहीद का दर्जा…

नक्सल पीड़ितों का कहना है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा झीरम हमले में मारे गए लोगों को पिछले वर्ष शहीद का दर्जा देने और नक्सली हिंसा में शहीद हुए सभी भाई-बहनों की स्मृति में 25 मई को प्रतिवर्ष झीरम श्रदांजलि दिवस मानाने की घोषणा की गई है। पीड़ितों की मांग है कि इसी तरह नक्सलियों द्वारा मारे गए अन्य लोगों को भी शहीद का दर्जा दिया जाये और उनके परिजनों को शहीद का प्रमाण पत्र दिया जाये।

पिता और पति दोनों को खोया…

सीएम से मिलने पहुंचने वालों में एक महिला भी शामिल थी, जिसके पिता और पति की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। इस महिला को भी अब तक राज्य और केंद्र सरकार की योजना का लाभ नहीं मिला है। अपनी मांग को लेकर वह भी सीएम से मिलने रायपुर पहुंची। पीड़ितों का आरोप है कि उनके साथ पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। पिछली सरकार के समक्ष गुहार लगाते काफी समय बीत गया। अब सरकार बदली है तो उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उन्हें पुनर्वास योजना का लाभ अवश्य दिलाएंगे।

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