सूरजपुर। बिजली का करंट लगने से एक मादा हाथी की मौत हो गई। इस घटना को छुपाने के लिए ग्रामीणों ने ऐसा षडयंत्र रचा कि इलाके के वन अमले को इसकी हवा तक नहीं लगी। घटना के महीने भर बाद अचानक DFO को एक अनजान शख्स ने फोन पर इसकी सूचना दी तो वन अमले के बीच हड़कंप मच गया।

लगाया था हाई वोल्टेज करंट

यह मामला सूरजपुर जिले के रमकोला वन परिक्षेत्र का है, जहां हाथियों की उपस्थिति को लेकर बेहद संवेदनशील घुई जंगल में लगातार फसलों को तबाह करने से नाराज ग्रामीणों ने एक महीने पूर्व जंगल किनारे हाई वोल्टेज करंट की बाड़ लगाई। इस दौरान करंट की चपेट में आने से एक मादा हथिनी की मौत हो गई।

शव को छिपाने के लिए रचा षड्यंत्र

पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से टांगी एवं फावड़े से हथिनी के पैर-सूंड सहित अन्य अंगों को काटकर अलग-अलग किया तथा मुख्य मार्ग से 400 मीटर दूर जंगल में अलग-अलग 12 गड्ढे खोदकर दफना दिया। आरोपियों का कहना है कि धान फसल को सुरक्षित रखने और हाथी नुकसान ना पंहुचा सके इसके लिए करंट लगाया था। हालांकि अन्य ग्रामीणों का कहना है कि जंगली सुअर को मारने के लिए करंट लगाया गया था, जिससे हाथी की मौत हो गई।

निगरानी दल को भी नहीं लगी खबर

वन विभाग का मैदानी अमला कितना नकारा है इस बात का खुलासा इस घटना से होता है, जिसमें 15 से 20 साल की उम्र की विशालकाय मादा हथिनी की मौत होती है और इस ह्रदय विदारक घटना की हवा न तो हाथियों की निगरानी करने वाले वनकर्मियों को लगी न ही ग्रामीणों को।

सूचना के बाद DFO हुए सक्रिय

शनिवार की शाम किसी ग्रामीण ने डीएफओ पंकज कमल को घटना की सूचना दी तो वन अधिकारियों में हड़कंप मच गया। शनिवार को रात होने के कारण मामले में कोई कारवाई नहीं हो सकी। रविवार को सुबह 8 बजे वन अधिकारी तीन सदस्यीय चिकित्सा दल और वन अमले की टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे एवं जांच शुरू की। पूरे दिन वन अधिकारी ग्रामीणों से पूछताछ करने के साथ ही जंगल की जांच करते रहे। कड़ी मशक्कत के बाद रमकोला बीट के कक्ष क्रमांक पी-244 में वन विभाग द्वारा निर्मित तालाब के पास अलग-अलग गड्ढों को खोदकर हथिनी के अंगों को बरामद किया गया। इस दौरान घटना स्थल पर वाइल्ड लाइफ CF के आर बढ़ई, सूरजपुर डीएफओ पंकज कमल, उपसंचालक, एलिफेंट रिजर्व श्रीनिवास तन्तेरी, उपवन मंडलाधिकारी आशुतोष भगत सहित बड़ी संख्या में रेंजर व वनकर्मी उपस्थित थे।

क्या कहते हैं पशु चिकित्सक

पशु चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. महेन्द्र पाण्डेय, एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर के डॉ. अजीत पाण्डेय व डॉ. शंभु पटेल की टीम ने मृत हथिनी के अंगों का पीएम किया। टीम ने बताया कि आरोपियों ने हथिनी के चारों पैर, उसके सुंड, जबड़े सहित विभिन्न अंगों को 12 टुकड़ों में काटने के बाद अलग-अलग 12 गड्ढों में दफनाया था। आरोपियों को हथिनी के अंगों को काटने एवं दफनाने में 20 घंटे से अधिक समय लगने की संभावना जताई जा रही है। मृत हथिनी का जबड़ा मिला है जबकि सिर का हिस्सा लापता है। शव के जबड़े में 10-10 दांत मिले हैं। पैर की लंबाई, गोलाई एवं दांतों के आधार पर चिकित्सक मृत हथिनी की उम्र 15 से 20 साल के बीच बता रहे हैं।

चार ग्रामीण गिरफ्तार

इस मामले में वन अमले ने धूरिया निवासी नरेंद्र सिंह गोंड़ (37), जनकू राम (52), रामचंद्र अगरिया (58), माधव अगरिया (27) को गिरफ्तार किया है। दो अन्य ग्रामीणों की संलिप्तता बताई गई है, जो फरार हैं। वन अमला उनकी खोजबीन में जुटा है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। सभी के खिलाफ वन्य प्राणी अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

अब तक 40 हाथियों की मौत

सूरजपुर वनमण्डल में अब तक सर्वाधिक हाथियों की मौत हुई है तथा अप्रैल 2016 के बाद अब तक विभिन्न जंगलों में 40 हाथियों की मौत हो चुकी है। हाथियों की सर्वाधिक मौतें करंट से हुई है। सूरजपुर, धरमजयगढ़ सहित हाथियों के बाहुल्य वाले इलाके में इनकी मौत की अधिकांश घटनाएं करंट लगने से हुई है। ग्रामीण या तो शिकार करने के लिए या फिर अपनी फसल बचाने के लिए हाई वोल्टेज करंट प्रवाहित नंगे तारों को बाड़ और खेतों में बिछा देते हैं। इससे कई छोटे-बड़े जानवर, और यहां तक कि ग्रामीणों की मौत भी हो जाती है, मगर वन अमला इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगा सका है। अपने कर्मियों के प्रति वन अधिकारियों का नरम रवैया न जाने और कितने बेजुबान हाथियों को बलि चढ़ाएगा।

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