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बैकुंठपुर (कोरिया)। छत्तीसगढ़ के कोरिया वनमंडल अंतर्गत बैकुंठपुर परिक्षेत्र के गांव सोंस में एक मादा भालू, नर भालू और उनके दो शावक कुएं में गिर गए। सुबह इनके चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने कुएं में देखा तो वहां 4 भालू नजर आए।

इस दौरान मौके पर पहुंची कोरिया वनमंडल की डीएफओ प्रभाकर खलखो, एसडीओ अखिलेश मिश्रा, रेंजर सहित वन कर्मियों की रणनीति से भालू का पूरा परिवार बाहर आया और जंगल की ओर रवाना हो गया। चार घंटे चले रेस्क्यू के बाद भालू के बाहर आने पर ग्रामीणों ने ताली बजाकर खुशी जाहिर की।

मूंगफली खाने पहुंचे थे भालू

कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सोंस में मूंगफली खाने पहुंचे भालू कुएं में गिर गए। कुएं में ज्यादा पानी नहीं था, उसके चारों ओर जगत (घेरा) नहीं होने और पेड़ों से ढंका होने के कारण भालुओं को अंदाजा नहीं रहा और मादा भालू, नर और उनके दो शावक कुएं में जा गिरे।

सुबह भालुओं के चिल्लाने की आवाज पर ग्रामीणों ने कुंए में देखा और फिर वन विभाग की टीम भालुओं को बाहर लाने के लिए रेस्क्यू शुरू किया, दूसरी ओर कुएं का पानी बेहद ठंडा होने के कारण भालू ने अपने शावकों को ढंक कर रखा था, कुएं के चारों ओर भीड़ होने के कारण भी वे डरे हुए थे।

सारे उपाय हुए बेकार तो…

वन विभाग की टीम के साथ पहुंचे एसडीओ अखिलेश मिश्रा ने पहले कुछ लंबे-लंबे बांस कुएं में डलवाए, ताकि उसके सहारे वो उपर आ सके। काफी इंतजार के बाद भालुओं ने उसके सहारे का फायदा नहीं उठाया।

इसी बीच कोरिया वन मंडल की डीएफओ प्रभाकर खलखो पहुंची, वो अपने साथ टब, रस्सी, भालुओं के खाने के लिए फल लेकर आई, खुद जाकर टब को तैयार कर कुएं में खाने की वस्तुएं डाली गई, मगर भालुओं ने उसे नहीं छुआ।

उसके बाद DFO के सुझाव पर यह तय हुआ कि जेसीबी के माध्यम से उन्हें ऊपर लाया जाए, जेसीबी आई और भालुओं तक पहुंचने की कोशिश की गई, परन्तु भालू जेसीबी को देख और विचलित होने लगे।

जिसके बाद यह निर्णय लेना पड़ा कि कुएं के एक सिरे को जेसीबी से खोद कर रास्ता बनाया जाए, इसीके मुताबिक रास्ता बनाया गया, जिसके बाद भालू का पूरा परिवार एक-एक करके बाहर आया और जंगल की ओर चला गया।

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