रायपुर। हर वर्ष ईद और अन्य त्योहारों के मौके पर शांति बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस द्वार शांति सामिया की बैठक रखी जाती है,

ऐसे मौके पर शहर में इक्का दुक्का स्थानों पर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाली घटनाएं घट चुकी हैं, बावजूद इसके प्रशासन ने कोई बैठक नहीं कराई। अब जब इस संबंध में पूछा जाता है तो अफसर एक दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी थोप कर अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर रहे हैं।

राजधानी रायपुर में कई इलाके ऐसे हैं जहां आए दिन आपसी तनाव की घटनाएं घटती रहती हैं। हाल ही में मौदहा पारा में ऐसी ही एक घटना घटी, जिसमें पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की। इस तरह की घटनाओं को देखते हुए पूरे जिले में जिला और थाना स्तर पर शांति समिति की बैठक आयोजित की जाती है। मगर इस तरह की कोई बैठक इस बार नहीं हुई। इस संबंध में जब समिति से जुड़े चंद लोगों ने बदली हुई व्यवस्था के तहत पुलिस कमिश्नर कार्यालय से संपर्क किया तो बताया गया कि बैठक जिल प्रशासन द्वारा आयोजित की जाती है इसलिए उनसे संपर्क किया जाए। मगर जब इस संबंध में प्रशासन से पूछा गया तब कहा गया कि बदली हुई कमिश्नरी व्यवस्था के तहत पुलिस कमिश्नर को बैठक बुलाना था। इस उधेड़बुन में किसी ने भी बैठक नहीं बुलाई।

दरअसल शांति समिति की बैठक में शांति और सुरक्षा व्यवस्था के अलावा पेयजल और अन्य सुविधाओं को लेकर भी चर्चा की जाती है, ताकि समय पर अलग अलग विभाग सारे इंतजाम कर सकें मगर ऐसी कोई भी बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में अगर कोई अव्यवस्था या फिर तनाव की स्थिति निर्मित हुई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ?

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