रायपुर। इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (iFOREST) ने आज सरोवर पोर्टिको, रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एक्सेलरेशन डायलॉग के दौरान अपना व्यापक आकलन जारी किया, जिसमें राज्य की मौजूदा भूमि और ऊर्जा परिसंपत्तियों का उपयोग कर नवीकरणीय ऊर्जाविस्तार की विशाल संभावनाओं को रेखांकित किया गया।

इस संवाद का नेतृत्व डॉ. श्रेष्ठा बनर्जी, निदेशक, iFOREST ने किया। इसमें राज्य सरकार के अधिकारियों, छत्तीसगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (CREDA), यूटिलिटी कंपनियों, नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अधिकारियों और क्षेत्र विशेषज्ञों ने भाग लिया।
डॉ. सृष्टा बनर्जी, निदेशक, iFOREST ने संवाद का उद्घाटन करते हुए कहा “छत्तीसगढ़ में नवीकरणीय ऊर्जाकी बहुत अधिक संभावनाएँ हैं। हालांकि, राज्य का एक बड़ा हिस्सा उच्च जनजातीय आबादी के कारण पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जिससे बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जापरियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और परिवर्तन एक चुनौतीपूर्ण विषय है। इसलिए, छत्तीसगढ़ को फ्लोटिंग सोलर जैसी भूमि-तटस्थ तकनीकों का उपयोग करना चाहिए, खनन भूमि का पुनःउपयोग करना चाहिए और बंजर भूमि का पुनर्विकास कर जिम्मेदार नवीकरणीय ऊर्जाविकास को बढ़ावा देना चाहिए,”
“छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बैटरी स्टोरेज और पंप स्टोरेज परियोजनाओं को लागू करने हेतु नीतियों पर कार्य कर रहा है,” संवाद के दौरान सी.एल. नेताम, कार्यकारी निदेशक, CSPGCL ने कहा।

फ्लोटिंग सोलर की अपार संभावनाएं
iFOREST के आकलन के अनुसार छत्तीसगढ़ की कुल नवीकरणीय ऊर्जाक्षमता 77.5 गीगावाट है, जिसमें 41 गीगावाट से अधिक ग्राउंड-माउंटेड सोलर और 39 गीगावाट फ्लोटिंग सोलर शामिल हैं।
राज्य में 34,000 से अधिक जलाशय हैं, जिनमें फ्लोटिंग सोलर की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। यह अवसर स्थायी (perennial) और अस्थायी (non-perennial) दोनों प्रकार के जलाशयों में उपलब्ध है। iFOREST के आकलन के अनुसार, लगभग 46% जलाशय स्थायी हैं, जो वर्षभर स्थिर जल स्तर प्रदान करते हैं और सालभर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के लिए उपयुक्त हैं।
बंजर भूमि और खनन भूमि का भी हो सकता है उपयोग
ग्राउंड-माउंटेड सोलर की स्थापना के लिए बंजर भूमि के उपयोग तथा खनन भूमि और विरासत ऊर्जा परिसंपत्तियों के पुनःउपयोग में एक बड़ा अवसर निहित है। भारत के सबसे बड़े खनन राज्यों में से एक होने के कारण, बंद और शीघ्र बंद होने वाली खदानों के साथ उपलब्ध भूमि का पुनःउपयोग एक महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य में ओपनकास्ट खदानों के साथ 9,800 हेक्टेयर से अधिक भूमि उपलब्ध है, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा आगामी 10 वर्षों में पुनःउपयोग और हरित ऊर्जा निवेश के लिए योजनाबद्ध किया जा सकता है।
दिसंबर 2025 तक छत्तीसगढ़ की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जाक्षमता 2,075 मेगावाट है (जो कुल स्थापित क्षमता 26,288 मेगावाट का 8% है)।
इस क्षमता को तीव्र और व्यापक स्तर पर साकार करने के लिए iFOREST निवेशक-अनुकूल नीतियों को अपनाने की सिफारिश करता है, साथ ही भूमि-तटस्थ तकनीकों, खनन भूमि पुनःउपयोग और पारिस्थितिकी तंत्र सहयोग के लिए प्रोत्साहनों पर बल देता है। इसके अतिरिक्त, राज्य को अपनी 39.35 गीगावाट की विशाल क्षमता को अनलॉक करने के लिए एक समर्पित राज्य-स्तरीय फ्लोटिंग सोलर नीति विकसित करनी चाहिए। इस नीति में:
• FSPV को एक रणनीतिक, भूमि-तटस्थ नवीकरणीय ऊर्जाविकल्प के रूप में मान्यता दी जाए, जो जल संरक्षण और आजीविका समर्थन करता है।
• बड़े पैमाने और वितरित परियोजनाओं को शामिल करते हुए पाँच-वर्षीय 2,000 मेगावाट क्षमता लक्ष्य निर्धारित किया जाए।
• निवेश आकर्षित करने हेतु नियामकीय स्पष्टता, पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा उपाय तथा वित्तीय प्रोत्साहन सुनिश्चित किए जाएं।
छत्तीसगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एक्सेलरेशन डायलॉग नीति समन्वय को आगे बढ़ाने और खनन भूमि पुनःउपयोग एवं जलाशय उपयोग पर केंद्रित परियोजना पाइपलाइन विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह छत्तीसगढ़ को पूर्वी भारत में स्वच्छ ऊर्जा लीडर के रूप में उभरने में सक्षम बनाएगा, साथ ही पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, आर्थिक विविधीकरण और खनन समुदायों के लिए सामाजिक लाभ सुनिश्चित करेगा।

