रायपुर। रायपुर-विशाखपत्तनम भारतमाला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण घोटाले में जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू-एसीबी ने तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और लखेश्वर प्रसाद किरण, तत्कालीन नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा, जिला रायपुर को गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी को इस पूरे प्रकरण में एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है।
कोर्ट ने दी 20 तक की रिमांड
गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने दोनों अधिकारियों को विशेष न्यायालय में पेश किया। EOW/ACB की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि मामले की गंभीरता, वित्तीय लेन-देन की जटिलता तथा महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी के लिए आरोपियों से विस्तृत पूछताछ आवश्यक है। एजेंसी ने आरोपियों की कस्टडी की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए दोनों को 20 फ़रवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिमांड अवधि के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिनसे पूरे घोटाले की परतें खुलने की संभावना है।
बता दें कि वर्तमान में शशिकांत कुर्रे पदोन्नत होकर डिप्टी कलेक्टर बन चुके हैं, वहीं लखेश्वर किरण भी बतौर तहसीलदार पदोन्नति पा चुके हैं। आरोप है कि दोनों अफसरों ने पद का दुरुपयोग कर आपराधिक षड्यंत्रपूर्वक अपने अधीनस्थ पटवारी, राजस्व निरीक्षक, भू-माफिया व अन्य के साथ मिलकर कूटरचित राजस्व अभिलेख दस्तावेज तैयार कर प्रभावित भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजा से कई गुना अधिक मुआवजा राशि दिलवाकर शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति कारित की गई है।
गौरतलब है कि दोनों अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे निरस्त कर दिया गया। इन आरोपियों और अन्य फरार चल चल रहे लोकसेवकों के विरुद्ध विशेष न्यायलय से स्थायी वारंट एवं उद्घोषणा गई। साथ ही कुर्की की कार्यवाही के लिए प्रकरण विचाराधीन है।

