रायपुर। सावित्री बाई फुले (SBP) एजुकेशनल अकादमी Saddu, रायपुर, छत्तीसगढ़ में मूवमेंट21, सोशल जस्टिस लीगल फाउंडेशन (सोजलिफ), दलित मूवमेंट एसोसिएशन (DMA), DMA India YouTube चैनल एवं विभिन्न संस्थानों के साथियों के संयुक्त तत्वाधान में “राष्ट्रीय शिक्षक दिवस” पूर्व वर्ष अनुसार ही बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस उत्सव में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

भारतीय संविधान का प्रस्तावना पाठ, माता सावित्री बाई फुले के जीवन और योगदान पर चर्चा और शिक्षा पर आधारित QUIZ, सभी संस्थाओं और शामिल सदस्यों के द्वारा परिचय और विचार साझा सत्र, शिक्षा, उद्यमिता और सभी व्यक्तियों और संस्थाओं के मध्य एकता और विभिन्न कार्यकर्मों के साझा आयोजन पर जोर, सावित्री बाई फुले के जीवन और कार्यों तथा शिक्षकों के सम्मान संबंधी शपथ, संविधान गीत, कविता पाठ, सेल्फी जोन सहित अन्य सांस्कृतिक आयोजन इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे।

सावित्री बाई फुले (SBP) एजुकेशनल अकादमी Saddu , रायपुर , छत्तीसगढ़ में मनाये गए राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के उस्तव में लोगो ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिए। ‘धन्य धन्य सावित्रीबाई’ गाने के साथ सावित्रीबाई और उनके योगदान को याद करते हुए लोग भावुक होते देखे गए। डॉ. नीतिन गायकवाड, डॉ. प्रीतम वासनिक, डॉ. तुषार भारत जगज़ापे, रेखा गोंडाने द्वारा कार्यक्रम के शुरूआती सम्बोधन में सावित्रीबाई फूले के योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई ने ही हजारों वर्षो से शिक्षा से वंचित समुदायों और महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले। उन्होंने सावित्रीबाई के संघर्ष को भी लोगो के सामने रखा और शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं के सशक्तिकरण पर स्वयं और परिवार में बदलाव के साथ साथ समाज और विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के साझा प्रयास पर जोर दियाI

राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्विज का भी आयोजन किया गया जिसका संचालन आर्किटेक्ट संजय पटेल के द्वारा किया गया । इसमें सभी उपस्थित लोग सहभागी हुए। सावित्रीबाई के योगदान, शिक्षा का अधिकार कानून और समग्र शिक्षा अभियान पर आधारित इस अनोखी क्विज में बच्चो और बढ़ो ने सही उत्तर दिए और आकर्षक इनाम भी जीते।
इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक दिवस समारोह की विशेषता यह रही कि इसे ‘समान शिक्षा अभियान’ के थीम दी गयी थी। लोग समान शिक्षा अभियान के पोस्टर भी साथ लाये थे। सावित्रीबाई ने शिक्षा के द्वार खोले लेकिन उनका कार्य अभी भी अधूरा है क्योंकि शिक्षा में गुणवत्ता लगातार गिरन रही है और इसीलिए सभी के लिए समान उच्च गुणवत्ता की शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभियान लोगो द्वारा चलाया जा रहा है। उपस्थित लोगो से आवाहन किया गया की वे सभी इस अभियान में सहयोग करें।

संजय गजघाटे द्वारा उद्यमिता और खासकर युवाओं के द्वारा नवाचार, महिला उद्यमिता इत्यादि विषय पर मार्गदर्शन दिया गया। रतन गोंडाने और संजीव खुद्शाह के द्वारा क्रमशः कविता पाठ और समानता, न्याय, स्वतंत्रता, गरिमा जैसे संवैधानिक मूल्यों के लिए स्वयं और परिवार के स्तर पर विचार और व्यव्हार परिवर्तन पर जोर दिया गया. प्रोफेसर अंबिका टंडन और देवलाल भारती ने अपने व्याख्यान में बताया कि आज वर्तमान भारत में महिलाओं और विभिन्न पिछड़े वर्गों की बेहतर शिक्षा और बेहतर सामाजिक स्थिति माता सावित्रीबाई फुले जी, ज्योतिबा फुले और डॉ बाबा साहेब आंबेडकर सहित विभिन्न सामाजिक सुधारकों के जीवन पर्यंत संघर्ष और सामाजिक योगदानों का ही फल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक समानता के लिए हमें आगे भी मिलकर उनके मूल्यों और आदर्शों पर निरंतर चलने का साझा प्रयास करते रहना चाहिए।
इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि कार्यक्रम समाप्ति के पश्चात सभी लोगो ने कार्यक्रम स्थल की सफाई की और उसे स्वच्छ किया। अगले वर्ष फिर अधिक उत्साह के साथ मिलने की आशा के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

