रायपुर। केंद्र सरकार ने सांसदों एवं राज्य विधानमंडलों के सदस्यों के साथ सरकारी अधिकारियों के आचरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा स्पष्ट किया गया है कि सांसदों-विधायकों के साथ असभ्य व्यवहार, जानबूझकर कार्यों में देरी, संवाद की उपेक्षा अथवा प्रोटोकॉल उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिष्टाचार एवं सम्मानपूर्ण व्यवहार अनिवार्य

निर्देशों के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में असभ्य व्यवहार नहीं करेगा और न ही कार्य निपटान में अनावश्यक या जानबूझकर देरी करेगा। सांसदों एवं विधायकों के साथ शिष्टाचार एवं सम्मानपूर्ण व्यवहार अनिवार्य है। हालांकि, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सदस्यों की बात ध्यानपूर्वक सुनें, लेकिन निर्णय सदैव नियमों एवं अपने सर्वोत्तम विवेक के आधार पर ही लें।

‘स्वागत और विदाई के लिए अधिकारी को खड़ा होना चाहिए’

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सांसदों अथवा विधायकों के साथ तय की गई किसी बैठक में यदि किसी कारणवश परिवर्तन आवश्यक हो, तो संबंधित सदस्य को तत्काल इसकी जानकारी दी जाए और उनकी सहमति से नई तिथि निर्धारित की जाए। किसी अधिकारी से मिलने आने पर सांसदों एवं विधायकों के स्वागत और विदाई के लिए अधिकारी को खड़ा होना चाहिए तथा सुरक्षा नियमों के अधीन उनके वाहनों के प्रवेश एवं बैठने की उपयुक्त व्यवस्था की जा सकती है।

‘संदेशों की अनदेखी को गंभीर लापरवाही होगी’

निर्देशों में यह भी कहा गया है कि अधिकारियों को सांसदों-विधायकों द्वारा छोड़े गए टेलीफोन संदेशों, मोबाइल पर प्राप्त एसएमएस और ई-मेल का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर उत्तर देना होगा। ऐसे संदेशों की अनदेखी को गंभीर लापरवाही माना जाएगा।

‘सार्वजनिक समारोहों में अनिवार्य रूप से आमंत्रण’

सार्वजनिक कार्यक्रमों और बैठकों को लेकर जारी निर्देशों में कहा गया है कि संबंधित क्षेत्र के सांसदों को सरकारी कार्यालयों द्वारा आयोजित सभी सार्वजनिक समारोहों में अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाए। बैठने की व्यवस्था और मंच पर स्थान वारंट ऑफ प्रेसीडेंस के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी सांसद का निर्वाचन क्षेत्र एक से अधिक जिलों में फैला हो, तो उसके निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित किया जाना अनिवार्य होगा।

सांसदों एवं विधायकों के पत्राचार के संबंध में यह निर्देश दिए गए हैं कि उनके पत्रों की तत्काल प्राप्ति-सूचना दी जाए और निर्धारित समय-सीमा में उत्तर भेजा जाए। स्थानीय महत्व से जुड़ी मांगी गई जानकारी स्पष्ट और तथ्यात्मक होनी चाहिए तथा उसकी सॉफ्ट कॉपी ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जाए। यदि किसी कारणवश जानकारी उपलब्ध कराना संभव न हो, तो उच्च प्राधिकारी की अनुमति लेकर कारण स्पष्ट करते हुए उत्तर दिया जाए।

‘निजी मामलों में किसी भी प्रकार की सिफारिश न करें’

वहीं, सरकारी कर्मचारियों को अपने निजी मामलों में किसी भी प्रकार की सिफारिश के लिए सांसदों या विधायकों से संपर्क न करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा करना आचरण नियमों के तहत प्रतिबंधित है।

‘सेवा नियमों के तहत होंगे दंडित’

इस विषय पर विभिन्न संसदीय समितियों ने भी समय-समय पर सख्त सिफारिशें की हैं। समितियों ने स्पष्ट कहा है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच आधिकारिक व्यवहार से जुड़े निर्देशों का सभी अधिकारियों द्वारा कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। सरकार ने दो टूक कहा है कि इन नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को लागू सेवा नियमों के तहत दंडित किया जाएगा।

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