रायपुर। एक दशक पहले छत्तीसगढ़ के दरभा घाटी में हुए झीरम घाटी हमले के मास्टरमाइंड चैतू के सरेंडर के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल उठाया है कि क्या अब एनआईए उस मास्टरमाइंड से पूछताछ करेगी और यह पता लगाएगी कि इस भीषण हमले की साजिश किसने रची और क्यों रची। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा इस जांच को आगे बढ़ने से रोकती रही है, जबकि सत्य सामने आना चाहिए।
32 लोगों की चली गई थी जान
25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सहित 32 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले की जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपा गया था।
एनआईए ने सितंबर 2014 में पहली चार्जशीट और अक्टूबर 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 150 से अधिक नक्सलियों को आरोपी बताया गया।एनआईए की जांच पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे। पीड़ित परिवारों और कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि ‘बड़ी राजनीतिक साजिश’ की कड़ी जांच में शामिल नहीं की गई।
कई गवाहों, सुरक्षा अधिकारियों और हमले में घायल बचे लोगों से विस्तृत पूछताछ नहीं की गई। वर्षों तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से संदेह और बढ़ा। 2018 में जब प्रदेश में सरकार बदली तो भूपेश बघेल की सरकार ने 2019 के बाद झीरम कांड की पुनः जांच की कोशिश की। पीड़ित परिवारों की शिकायतों के आधार पर 2020 में दरभा थाने में ‘बड़े षड्यंत्र’ को लेकर नई FIR दर्ज की गई।
इस FIR पर रोक लगाने के लिए एनआईए ने अदालत में याचिका दायर की, लेकिन निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट दोनों ने एनआईए की अपील खारिज कर दी। नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एनआईए की याचिका ठुकरा दी और राज्य पुलिस को साजिश की कड़ी की जांच जारी रखने की अनुमति दे दी।
बघेल ने इसे ‘न्याय के दरवाज़े खुलने जैसा फैसला’ बताया था। उनका कहना है कि झीरम कांड सिर्फ नक्सली हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़ी साजिश थी जिसकी परतें अब भी अनखुली हैं। हालांकि दिसंबर 2023 में प्रदेश में फिर से सत्ता परिवर्तन हो गया और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य पुलिस को जांच का अधिकार मिल चुका है। लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की वजह से 2020 में दरभा थाने में दर्ज एफआईआर पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो सकी। अब जब घटना का कथित मास्टरमाइंड आत्मसमर्पण कर चुका है, तो भूपेश बघेल ने उम्मीद जताई है कि एनआईए और संबंधित एजेंसियों को अब साजिशकर्ताओं तक पहुंचने में देर नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में सच्चाई सामने आने से आखिर किसे डर है और भाजपा जांच को आगे बढ़ने से क्यों रोकती रही। देखना यह है कि पूर्व सीएम के सवाल उठाने के बाद छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार और NIA क्या कदम उठाते हैं।

