0 हाई कोर्ट ने पूछा – मकान का छज्जा शोर से नहीं, वाहन की टक्कर से टूटा तो डीजे संचालक की गिरफ्तारी क्यों ?
0 प्रदूषण नियंत्रण समिति से इस हादसे को संज्ञान में लेने की गई अपील

बिलासपुर/रायपुर। बिलासपुर जिले के मल्हार में पिछले दिनों शोभायात्रा के दौरान डीजे के शोर से मकान का छज्जा गिरा और इसकी चपेट में आकर 11 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, वहीं 10 लोग घायल हो गए। वहीं पुलिस ने DJ की आवाज से नहीं बल्कि वाहन की टक्कर से हादसा होने का जुर्म दर्ज किया है। इस पर हाई कोर्ट ने सवाल उठाते हुए हादसे पर कलेक्टर को शपथ पत्र जमा करने को कहा है। हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस हादसे को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर सुनवाई की।

महाधिवक्ता को लगाई फटकार

चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मकान का छज्जा डीजे की तेज आवाज से नहीं, बल्कि डीजे वाहन के टकराने से गिरा था। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वाहन के टकराने से छज्जा गिरा, तो फिर डीजे संचालक पर गैर-इरादतन हत्या का मामला क्यों दर्ज किया गया? चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता को यहां तक कह दिया कि ऐसा लगता है, इनके मकान बनाने का ठेका आपको मिल गया है।

बता दें कि मस्तूरी क्षेत्र के मल्हार में हिंदू नववर्ष पर 30 मार्च को एक शोभायात्रा निकाली जा रही थी। जब यह केंवटपारा पहुंची तो एक मकान का छज्जा गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि डीजे की तेज आवाज के कारण छज्जा गिरा, जबकि पुलिस का कहना था कि डीजे वाहन के मकान से टकराने के कारण छज्जा गिरा है। छज्जे के नीचे खड़े 10 लोग इसकी चपेट में आ गए। 11 वर्षीय प्रशांत भी गंभीर रूप से घायल था जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

पहले से ही ध्वनि प्रदूषण के मामलों में अदालतों के सख्त निर्देश को देखते हुए पुलिस ने डीजे संचालक, वाहन चालक और आयोजकों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। पुलिस ने डीजे संचालक और ड्राइवर को गिरफ्तार कर 15 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया। मामले में 4 और आरोपी हैं, जो फरार हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई है? महाधिवक्ता ने जवाब दिया कि गैर इरादतन हत्या के तहत अपराध दर्ज कर डीजे संचालक व ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया है जबकि आयोजकों में से 4 फरार हैं।

कोर्ट ने सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए बिलासपुर कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। मकान मालिक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने पूछा कि जिसका मकान गिरा, उसे कोई मुआवजा मिला या नहीं? इस पर जवाब मिला कि अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित की है।

हादसे से सबक लेने की प्रदूषण नियंत्रण समिति से की गई मार्मिक अपील

दरअसल सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 27.01.2025 को जारी आदेश के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण के मामलों में अब तक की गई कार्रवाइयों की समीक्षा करने, छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों की तुलनात्मकता और प्रभावकारिता का अध्ययन करने, तथा उक्त अधिनियम और नियमों में संशोधन के संबंध में सिफारिशें करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यीय का गठन किया गया है।

30 मार्च को बिलासपुर के मस्तूरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत मल्हार में हुए हादसे को लेकर पर्यावरण प्रेमी नितिन सिंघवी ने समिति के सदस्यों को पत्र लिखकर मार्मिक अपील की है कि इन 5 छोटे बच्चों के लिए, जो बिना किसी कारण पीड़ा में हैं और एक नन्ही जान के असमय चले जाने के गहरे दुख को शब्दों में बयान करना मुश्किल है। उन्हें पीड़ितों के लिए अपार दुख और प्रशासन की लापरवाही के प्रति गुस्सा महसूस होता है। यह त्रासदी टाली जा सकती थी और इसके लिए केवल आंसुओं से अधिक पहल करने की आवश्यकता है। यह घटना जवाबदेही, न्याय और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस कदमों की मांग करती है।

क्या लिखा है इस पत्र में

पत्र में नितिन सिंघवी ने लिखा है कि समिति के सदस्यों को यह याद रखना चाहिए कि इन डीजे ने अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, यह प्राकृतिक आपदा नहीं है। छत्तीसगढ़ में कई कमजोर बच्चे तेज शोर और लेजर लाइट्स के कारण स्थायी रूप से बहरे या अंधे हो गए हैं। कुछ साल पहले डीजे की आवाज से दो लोगों की हृदयघात से मौत हो गई थी, एक अधेड़ ने आत्महत्या भी की है। स्वस्थ वयस्क भी इन अक्षमताओं से पीड़ित हैं।

किसी के साथ भी हो सकता है यह हादसा…

सिंघवी ने समिति को लिखा है कि यह किसी के भी साथ हो सकता है। आपका बच्चा, मेरा बच्चा, आपके प्रियजन, मेरे प्रियजन या यहां तक कि आप और मैं। इसलिए समिति को डीजे, लाउडस्पीकर, शोर उत्पन्न करने वाले उपकरणों और लेजर लाइट्स के इस घातक खतरे को रोकना होगा। वाहनों या सड़कों पर उपयोग होने वाले हर डीजे सिस्टम, लाउडस्पीकर या शोर उत्पन्न करने वाले उपकरण के साथ ही लेजर लाइट्स को जब्त कर उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद नष्ट कर देना चाहिए। इसी तरह डीजे, साउंड बॉक्स, लेजर लाइट्स या इसी तरह के उपकरणों से लैस हर वाहन को राजसात कर लिया जाना चाहिए।

क्या समिति गठन की आवश्यकता थी?

सिंघवी ने चर्चा में बताया कि उन्हें बहुत दुःख है कि प्रदेश का प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए कतई गंभीर प्रतीत नहीं होता। अन्यथा इस समिति की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि ध्वनि प्रदूषण नियम केंद्र शासन के हैं और कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के नियम राज्य शासन के हैं। हमारा संविधान प्रावधानित करता है कि जब दो कानून हों तो केंद्र का कानून लागू होगा। कोलाहल अधिनियम, जो कि 1985 में लागू किया गया था में एक हजार रुपए का फाइन है या छ: माह की सजा है, केंद्र के नियम में एक लाख तक का फाइन तथा 5 साल तक की सजा है। प्रशासन कोलाहल अधिनियम में प्रकरण दर्ज करता है जिससे एक हजार की पेनल्टी पटा कर डीजे ऑपरेटर खुशी खुशी बच जाते हैं। मुद्रास्फीति के चलते एक हजार की कोई औकात नहीं बची है। प्रशासन ने केंद्र के नियमों के तहत कोई कार्यवाही आज तक नहीं की है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ शासन की अधिसूचना के अनुसार ही डीजे की ध्वनि प्रदूषण से हुए पर्यावरण नुकसान की भरपाई भी रु दस हजार वसूली जानी है और सभी स्पीकर जप्त किये जाने है, पर्यावरण नुकसान की भरपाई का एक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है।

क्या है कोर्ट का आदेश

2016 के उच्च न्यायालय के आदेश में और राज्य शासन के आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी वाहन पर डीजे बजाने पर उसे जप्त किया जाएगा और कलेक्टर द्वारा उसे छोड़ा जाएगा। परंतु पूरे प्रदेश में एक भी प्रकरण ऐसा नहीं हुआ है कि डीजे जब्त कर कलेक्टर द्वारा कार्यवाही की गई हो। इसके विपरीत कोलाहल अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज करके डीजे ऑपरेटरों को बचाया जाता है। कोर्ट के आदेश के अनुसार एक ही वाहन को दो बार डी जे बजाते पकड़े जाने पर उसका परमिट निरस्त करना है, जो कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही पुनः दिया जा सकता है, परंतु एक भी वाहन ऐसा जप्त नहीं किया गया है। इससे पता लगता है कि प्रशासन को आमजन की चिंता नहीं है।

छोटे बच्चों के माता पिता से अपील

सिंघवी ने छोटे बच्चों के माता पिता को सुझाव दिया है कि बच्चों को लेकर किसी भी ऐसी शादी बयाह या कार्यक्रम में न जाए जिसमें डीजे बजने वाला हो, यह बच्चे के लिए घातक हो सकता है। यह पूरी तरह सुनिश्चित करें कि डीजे की लेजर लाइट बच्चो की आंख पर नहीं आये।

You missed

error: Content is protected !!