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रायपुर। आपातकाल में बंदी बनाये गए लोगों के संगठन लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद कैलाश सोनी ने छत्तीसगढ़ में पूर्व की भूपेश सरकार द्वारा मीसा बंदियों की सुविधाएं रोके जाने के बाद अब इसे फिर से शुरू किये जाने की उम्मीद जताई है। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान देश में लोकतंत्र पूरी तरह समाप्त हो गया था।

रायपुर प्रेस क्लब में लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा आयोजित पीसी में शामिल कैलाश सोनी ने कहा कि 1975 से 1977 के बीच 21 माह का कालखंड देश के इतिहास का काला अध्याय रहा है, जब कांग्रेस की इंदिरा गांधी की सरकार ने तानाशाही राज स्थापित करते हुए देश में आपातकाल लागू कर दिया था। उस दौरान मीसा कानून लगा कर विपक्षी दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया था। कालांतर में इन्हीं मीसा बंदियों का संगठन बनाकर उनके सम्मान की लड़ाई लड़ी गई।

कैलाश सोनी ने बताया कि जिन परिवारों के सदस्यों को 21 माह की कालावधि में अकारण जेलों में डाल दिया गया, नौकरियां छीन ली गयी, उनका दोष केवल यह था कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ, समाजवादी, जमायते इस्लामी, आनंद मार्ग आदि के सदस्य थे, उन परिवारों की मार्मिक स्थिति जर्जर हो गयी तो ऐसे परिवारों को जब-जब देश के राज्यों में अनुकूल सरकारें आयी तो उन परिवारों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया। बता दें कि कैलाश सोनी मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के रहने वाले हैं और भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं।

भाजपा सरकार ने शुरू की थी सम्मान निधि

इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में जब डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी तो वर्ष 2008 से प्रदेश के मीसाबंदियों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा देकर प्रतिमाह कुछ सम्मान निधि, स्वास्थ्य सुविधा आदि से सम्मानित करना प्रारंभ किया गया, जिससे उन बुजुर्गों को सम्मान भी मिला और उन्हें इलाज आदि हेतु कुछ मदद भी मिलने लगी लेकिन जैसे ही सन 2019 में भूपेश बघेल की सरकार बनी, सम्मान निधि को बंद कर दिया गया। इसके खिलाफ सेनानी संघ ने हाइकोर्ट की शरण ली और वहां जीत भी हासिल हुई मगर सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। अब यह मामला लंबित है।

सत्ता परिवर्तन के बाद जगी आस

छत्तीसगढ़ में पुनः भाजपा सरकार बनी है, जिससे लोकतंत्र सेनानियों में पुनः आस जगी है कि यह सरकार शीघ्र ही लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान को पुनः वापस लौटायेगी। इस हेतु सरकार बनते ही संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भेंट कर पहल की है।

प्रदेश स्तरीय सम्मलेन कल

संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने बताया कि कल 10 जनवरी को प्रदेश के मीसाबंदी परिवारों/लोकतंत्र प्रहरी के सदस्यों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन राजधानी के वृन्दावन सभा कक्ष में आयोजित है जिसमें प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री व विधायकों को आमंत्रित किया गया है।

बहरहाल लोकतंत्र सेनानी संघ इस बात के लिए आश्वस्त हैं कि पूर्वानुसार ही भाजपा की सरकार मध्यप्रदेश की स्तर पर छत्तीसगढ़ के लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान यथाशीघ्र लौटाकर एक वैचारिक आंदोलन को भी महत्व प्रदान करेंगी। लोकतंत्र सेनानी संघ देश के उन सभी राज्यों से संपर्क कर शासन व सेनानियों के मध्य उनकी समस्याओं हेतु सेतू का काम कर रही है और इसमें सफलता भी मिली है।

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