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बिलासपुर। स्कूली बच्चों को खतरा मोल लेकर इंजन के सामने से रेलवे पटरी को पार करने के वाकये को हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले में कोर्ट ने एक जनहित याचिका दर्ज कर रेलवे को नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।

बिलासपुर रेलवे स्टेशन के एक ओर पूरा शहर है, तो वहीं दूसरे छोर पर भी शहर के कई वार्ड हैं। इन्हें रोजाना पटरी पार कर शहर की ओर आना पड़ता है। इनमें स्कूली बच्चे भी होते हैं। हाल ही में एक स्थानीय अखबार में तस्वीर छपी थी जिसमें दिखाया गया था कि स्कूली बच्चे एक इंजन के सामने से पटरी पार कर रहे हैं।

अधूरा पड़ा है ओवरब्रिज

पहले यहां पर फुट ओवरब्रिज हुआ करता था, जिसके टूटने के बाद दूसरा ब्रिज रेलवे ने निर्माण शुरू किया था, पर चार साल से यह अधूरा पड़ा है। इसके चलते हजारों लोग खतरे के बीच एक दिशा से दूसरी ओर प्रतिदिन आना-जाना करते हैं। यदि कोई मालगाड़ी खड़ी होती है तो उसे नीचे से भी पार करना पड़ता है।

बहुत बड़ा हादसा हुआ था यहां

गौरतलब है कि इसी जगह पर अब से 12 साल पहले 22 अक्टूबर 2011 की शाम को रेलवे लाइन क्रॉस करने के दौरान ट्रेनों से टकराकर 15 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से अधिकांश मजदूर थे जो शहर से काम करके वापस घर लौट रहे थे। दुर्घटना तब हुई जब दोनों ओर से एक ही समय में कई ट्रेन गुजरने लगी और लोगों को भागने की जगह भी नहीं मिली। इसके बाद एक अंडरब्रिज का निर्माण किया गया है। इस अंडरब्रिज से वाहन गुजरते हैं लेकिन अधिकांश पैदल चलने वाले इसका इस्तेमाल नहीं करते। इनके लिए फुट ओवरब्रिज बनाया गया था।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने प्रकाशित तस्वीरों को लेकर रेलवे व राज्य सरकार के प्रति नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए कहा कि इंजन के सामने बच्चे पैदल चलते हुए पटरी पार कर रहे हैं। रेलवे जैसे विभाग में संवेदनशीलता दिखाई नहीं दे रही है। क्या उन्हें पता नहीं है कि कौन सा काम प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। कोर्ट ने रेलवे और राज्य सरकार को दो दिन के भीतर जवाब दाखिल करने कहा है। मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।

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