• महिला कर्मियों को कर रहे हैं प्रताड़ित

  • शिकायत के बाद भी जारी है प्रताड़ना का दौर, आयोग में शिकायत का भी असर नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का मनरेगा सोशल ऑडिट यूनिट पूरी तरह संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा पर निर्भर है। इस यूनिट का जिम्मा जिस अधिकारी के ऊपर है, उसे भाजपा के शासनकाल में दूसरे प्रदेश से आयातित किया गया। और यही आयातित अधिकारी अपने अधीनस्थ कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों-अधिकारियों को बुरी तरह प्रताड़ित कर रहा है। वह विशेष रूप से महिला कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहा है। इन्हीं में शामिल एक आदिवासी महिला कर्मी ने जब इसकी शिकायत अनुसूचित जनजाति आयोग से की तब उसके ऊपर प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत होने वाले कामकाज की समीक्षा के लिए छत्तीसगढ़ में सामाजिक अंकेक्षण इकाई का गठन किया गया है, जिसके अधीन जिलों में इकाइयां संचालित हैं। भाजपा के शासन काल मे छत्तीसगढ़ सोशल ऑडिट यूनिट का प्रमुख मेहेर गाडेकर को बनाया गया, बताया जाता है कि संघ तक पहुंच होने के चलते मनरेगा के अनुभव नहीं होने के बावजूद गाडेकर को नियुक्ति दी गई। इन दिनों इस यूनिट में मेहेर गाडेकर द्वारा की जा रही मनमानी से यहां के अधिकारी कर्मचारी त्रस्त हैं। गाडेकर पर विशेष तौर पर महिला कर्मियों को प्रताड़ित करने का आरोप है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में इसकी शिकायत भी की गई, मगर कार्रवाई नहीं होता देख यहां की महिला कर्मचारियों ने अनुसूचित जनजाति आयोग में इसकी शिकायत की है। इन्हीं में शामिल महिला ने बताया कि अधिकारी गाडेकर उन्हें सबसे सामने जलील करते हैं। और तो और, वे यूनिट के व्हाट्सएप्प ग्रुप में भी उनके कामकाज को लेकर टिप्पणी करते हैं। हद तो तब हो गई, जब मेहेर गाडेकर ने इस महिलाकर्मी को व्यक्तिगत रूप से व्हाट्सएप्प किया और उनकी जाति को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की।

 

  • पुलिस की पत्नी को कौन प्रताड़ित करेगा ?

गाडेकर ने महिलाकर्मी को लिखा है कि “तुमने हाल ही में एक मकान खरीदा है, प्रताड़ित व्यक्ति मकान नहीं खरीदते”। “जिसका पति फिल्मस्टार हो और पुलिस में नौकरी करता हो उसे कौन प्रताड़ित करेगा”। गाडेकर ने तो यहां तक लिख डाला है कि “गोंड़” तो राजा हुआ करते थे, इस जाति के लोग “कमार” और दूसरी जनजातियों के लोगों को प्रताड़ित किया करते थे।
“मेरी पत्नी तुमसे मिलने आ रही है”
व्हाट्सएप्प पर भेजे गए संदेश में मेहेर गाडेकर ने महिलाकर्मी को ये भी लिखा है कि “वुमेन्स एम्पावरमेंट को ट्रेनिंग में शामिल कराने वाले और विशाखा गाइडलाइन के बारे में पहल करने वाले व्यक्ति के खिलाफ महिला प्रताड़ना का मामला आखिर कैसे बनता है”। बिंदुवार भेजे गए इस संदेश के आखिर में गाडेकर ने लिखा है कि “मेरी पत्नी तुमसे मिलने पुणे से आ रहीं हैं। मेरी बूढ़ी माँ और बहन को भी बुलाऊं क्या?”
व्हाट्सएप्प में इतना खुलकर लिखने वाला व्यक्ति कार्यस्थल पर अपने अधिनस्थों को कितना प्रताड़ित करता होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। पीड़ित महिलाकर्मी की शिकायत पर अनुसूचित जनजाति आयोग ने मेहेर गाडेकर को तलब किया, तब उन्होंने यहां आकर अपना पक्ष भी रखा, मगर उनकी मनमानियां जारी रहीं, महिला ने बताया कि पूर्व में उसने महिला आयोग से इसकी शिकायत की थी, जिससे नाराज होकर मेहेर गाडेकर ने उसका टी ए बिल का भुगतान रोक दिया। यही नहीं, छत्तीसगढ़ सोशल ऑडिट यूनिट के विभागीय व्हाट्सएप्प ग्रुप में गैरजरूरी चीजों का उल्लेख कर उसकी छवि भी खराब की गई।

  • नौकरी से निकालने की धमकी

अपने खिलाफ की जा रही शिकायतों से बौखलाए मेहेर गाडेकर ने इसी दौरान यहाँ पदस्थ आई टी प्रबंधक को काम से निकालने की अनुशंसा भी कर दी। गाडेकर से प्रभावित तीन महिलाकर्मियों ने 22 बिंदुओं की शिकायत सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से की है। इन्होंने संचालक,सामाजिक अंकेक्षण इकाई मेहेर गाडेकर के खिलाफ तमाम शिकायतें की हैं। संचालक गाडेकर द्वारा 4 महिला कर्मियों को कहा गया है कि अगर आपको मुझसे दिक्कत है तो आप स्वयं नौकरी छोड़िए, वर्ना मैं आपको नौकरी से निकाल दूंगा। संचालक द्वारा बीते दो वर्षों से नियमविरुद्ध स्टेशनरी की खरीदी की जा रही है। वे बार बार यह कहते हैं कि “सोशल ऑडिट यूनिट एक एनजीओ है, इसलिए शासन के नियमों को मानना आवश्यक नहीं है”। उन्होंने नियम नहीं होने के बावजूद सरगुजा में पदस्थ संभागीय प्रबंधक मलखान सिंह का डिमोशन कर दिया। गाडेकर ने मनमाने ढंग से अपने चहेते कर्मियों की हाजिरी बनाई और दूसरे कर्मचारियों की उपस्थिति कार्यस्थल पर होने के बावजूद काट दी

  • छिन गया डी डी पॉवर

    मेहेर गाडेकर के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतों को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आर पी मण्डल ने उनका आहरण और वितरण अधिकार छीन लिया है, डी डी पावर वापस पाने के लिये भी गाडेकर ने जुगत लगाई। उसने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वित्तीय लेनदेन में दिक्कत संबंधी शिकायत लिखें, ताकि डी डी पॉवर वापस मिल सके, मगर अब तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी है।

  • कार्रवाई की उम्मीद

    सोशल ऑडिट यूनिट के संचालक की मनमानी की तमाम शिकायतें हो चुकी हैं, मगर अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। महिला कर्मियों पर प्रताड़ना का दौर बढ़ चुका है। एक महिला कर्मी को गाडेकर ने बाहर करने को आउटसोर्सिंग फर्म को लिख दिया है। वहीं दूसरी कर्मियों को निकालने की धमकी भी दे रहा है। महिला ही नहीं पुरूष कर्मचारी भी प्रताड़ित हो रहे हैं, वहीं गाडेकर के चहेते आर्थिक गड़बड़ियां भी कर रहे हैं, फिर भी प्रताड़ित कर्मियों को उम्मीद है कि देर-सबेर कार्रवाई तो होकर ही रहेगी।

     

     

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